शवों के सम्मान पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग की सख्ती

सरकारी अस्पतालों को गरिमा और संवेदनशीलता बनाए रखने के निर्देश

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चंडीगढ़ , 17  जुलाई 2026 । हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने सरकारी अस्पतालों में शवों के रखरखाव और अंतिम प्रक्रिया के दौरान गरिमा से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी मृतक के साथ असम्मानजनक व्यवहार या शवों की गरिमा से खिलवाड़ मानवाधिकारों का उल्लंघन है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

सोनीपत के मामले में एक परिवार ने आरोप लगाया था कि पोस्टमार्टम के पर दौरान फ्रीजर की सुविधा न मिलने से शव के संरक्षण में लापरवाही हुई  जिससे उन्हें भारी मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी। फरीदाबाद के बीके सिविल अस्पताल की रिपोर्ट में सामने आया कि 14 शव संरक्षण फ्रीजर चैंबरों में से केवल 10 ही चालू हालत में है जबकि चार बंद पड़े हुए हैं।

आयोग ने राज्य के सरकारी अस्पतालों और संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि शवों के संरक्षण, पहचान, पोस्टमार्टम, परिवहन और परिजनों को सौंपने की पूरी प्रक्रिया सम्मानजनक, पारदर्शी और निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाए। साथ ही अस्पतालों में शवगृह (मॉर्चरी) की व्यवस्था, स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का भी सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

आयोग ने यह भी कहा कि अस्पताल प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि मृतकों के परिजनों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाए और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। यदि किसी अस्पताल में लापरवाही या अमानवीय व्यवहार की शिकायत मिलती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए उचित कार्रवाई की जाएगी।

मानवाधिकार आयोग का मानना है कि जीवन के साथ-साथ मृत्यु के बाद भी प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करना राज्य और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है। आयोग के इस कदम को स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही और संवेदनशीलता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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