चमोली , 17 जुलाई 2026 । उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जहां सदियों से चली आ रही अनूठी परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां केवल महिला पूजारी (पुजारिन) की ही नियुक्ति की जाती है। धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, मंदिर की पूजा-अर्चना और अन्य सभी धार्मिक अनुष्ठान महिलाओं द्वारा ही संपन्न कराए जाते हैं।
चमोली जिले की उर्गम घाटी में समुद्र तल से लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध श्री फ्यूंला नारायण मंदिर अपनी विशिष्ट पूजा परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान नारायण का पुष्प श्रृंगार महिला पुजारी द्वारा किया जाता है। फ्यूंला नारायण मंदिर के कपाट कल बृहस्पतिवार को खोल दिए गए। इस वर्ष मंदिर की पूजा-अर्चना के लिए आनंदी देवी को महिला पुजारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जबकि आशीष पंवार को पुरुष पुजारी नियुक्त किया गया था।
महिलाओं द्वारा भगवान के पुष्प श्रृंगार की परंपरा
मंदिर में भगवान विष्णु चतुर्भुज स्वरूप में माता महालक्ष्मी और जय-विजय के साथ विराजमान हैं और आज भी ऋषि परंपरा के अनुसार यहां पूजा-अर्चना की जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी पुष्प लेने उर्गम घाटी आई थीं। इसी दौरान उन्होंने भगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर पर्वतीय फूलों से उनका श्रृंगार किया। तभी से इस मंदिर में महिलाओं द्वारा भगवान के पुष्प श्रृंगार की परंपरा चली आ रही है।
हर बार बदलते हैं पुजारी
मंदिर की पूजा की जिम्मेदारी प्रतिवर्ष भरकी, भेंटा, पिलखी, गंवाणा और अरोसी गांवों के ग्रामीणों को बारी-बारी से सौंपी जाती है। श्रावण संक्रांति पर खुलने वाले मंदिर के कपाट नंदा अष्टमी के बाद नवमी तिथि को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित हेलंग से लगभग 14 किलोमीटर वाहन मार्ग से भरकी गांव तक पहुंचना होता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परंपरा देवी की विशेष आस्था और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि मंदिर में महिला पुजारिन द्वारा की गई पूजा को अत्यंत शुभ माना जाता है और इसी वजह से वर्षों से इस व्यवस्था को कायम रखा गया है। नई पुजारिन का चयन भी पारंपरिक नियमों और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार किया जाता है।
यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी अनूठी परंपरा के कारण देशभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी बना हुआ है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और मंदिर की इस विशिष्ट परंपरा के बारे में जानने की उत्सुकता रखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कई ऐसे मंदिर हैं, जहां स्थानीय लोक परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं आज भी पूरी आस्था के साथ संरक्षित हैं। चमोली का यह मंदिर भी महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका और क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनूठा उदाहरण माना जाता है।