मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में देरी पर जापान के पूर्व मंत्री ने जताई नाराजगी,

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टोक्यो, 17  जुलाई 2026 । भारत की महत्वाकांक्षी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में हो रही देरी को लेकर जापान के एक पूर्व मंत्री ने चिंता और नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण प्रतीक है और इसे तय समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को समन्वय के साथ काम करना चाहिए।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लिखा कि प्रोजेक्ट के लेट होने की सबसे बड़ी वजह भारतीय मंत्री का रवैया रहा।

माकिहारा ने कहा कि वे खुद इस प्रोजेक्ट से जुड़े रहे हैं और जापानी टीम ने पूरी मेहनत से काम किया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले।

उनके मुताबिक, भारतीय पक्ष ने कई बार किए वादे पूरे नहीं किए। समझौते किए, फिर उनसे पीछे हट गए। आखिरी समय तक अपने हिसाब से शर्तें बदलते रहे। इसी वजह से बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया।

‘प्रधानमंत्री के दौरे से भी कोई नतीजा नहीं निकला’

माकिहारा के मुताबिक, प्रधानमंत्री के दौरे से भी कोई नतीजा नहीं निकला। दरअसल, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची 1-3 जुलाई 2026 में भारत दौरे पर आई थी।

इस दौरान दोनों देशों ने 129 समझौतों का ऐलान किया था। इन समझौतों का मकसद निवेश, उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, कौशल विकास और सप्लाई चेन सहयोग को मजबूत करना है।

पूर्व जापानी मंत्री ने परियोजना की धीमी प्रगति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में समय पर काम पूरा होना निवेशकों का विश्वास बनाए रखने और दोनों देशों के सहयोग को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि लंबित कार्यों में तेजी लाकर परियोजना को जल्द आगे बढ़ाया जाएगा।

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना है, जिसे जापान के तकनीकी और वित्तीय सहयोग से विकसित किया जा रहा है। परियोजना में अत्याधुनिक शिंकान्सेन (Shinkansen) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, भूमि अधिग्रहण, निर्माण संबंधी चुनौतियों और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण इसकी समयसीमा प्रभावित हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विकास को नई गति मिलेगी। इससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय काफी कम होगा, साथ ही व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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