ऋषिकेश में हाईवे परियोजना को लेकर विरोध तेज, 3,000 पेड़ों की कटाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवा,

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देहरादून , 13  जुलाई 2026 । ऋषिकेश में प्रस्तावित हाईवे परियोजना के लिए करीब 3,000 पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर बड़ी संख्या में युवा, छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक सड़कों पर उतर आए हैं। सोशल मीडिया पर इसे Gen-Z आंदोलन के रूप में भी देखा जा रहा है, जहां नई पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की मांग को प्रमुखता से उठा रही है।

देहरादून के कई सामाजिक संगठनों विशेष रूप से ‘जेन-जी’ (Gen-Z) और युवा पीढ़ी के बच्चों ने आंदोलन में बड़ी संख्या में भागीदारी की। इसका विरोध कर इतनी संख्या में काटे जा रहे पेड़ों के कटान को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने परियोजना पर सवाल उठाते हुए पेड़ों की कटाई और वन क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।

विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से क्षेत्र की जैव विविधता, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और स्थानीय पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार परियोजना के लिए ऐसा वैकल्पिक मार्ग तलाशे, जिससे विकास कार्य भी हो और पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुंचे।

दूसरी ओर, परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि हाईवे निर्माण से क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, यात्रा का समय कम होगा और पर्यटन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। उनका दावा है कि पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है और पेड़ों की कटाई के बदले प्रतिपूरक पौधारोपण (Compensatory Afforestation) सहित अन्य पर्यावरणीय उपाय भी किए जाएंगे।

पेड़ कटान को लेकर कड़ी नाराजगी

युवा संगठन मौके पर जाकर पेड़ों की बचाने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा पेड़ों की कटान के खिलाफ एनएचएआई ( NHAI ) कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन भी किया गया। युवाओं के भीतर इस पेड़ कटान को लेकर कड़ी नाराजगी थी। समाजसेवी अनूप नौटियाल ने हाईवे के निर्माण पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस हाईवे को चौड़ा करने की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं है।

इस मुद्दे ने सोशल मीडिया पर भी व्यापक बहस छेड़ दी है। एक पक्ष विकास परियोजनाओं को जरूरी बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की मांग कर रहा है। फिलहाल प्रशासन, पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के बीच संवाद की संभावना जताई जा रही है, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलित समाधान निकाला जा सके।

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