चार सरकारी बंगले होने के बावजूद 10 सर्कुलर रोड पर क्यों टिका है लालू परिवार का राजनीतिक और भावनात्मक केंद्र?

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नई दिल्ली, 01 जून्‌ 2026 । बिहार की राजनीति में 10 सर्कुलर रोड का पता केवल एक सरकारी आवास नहीं, बल्कि एक राजनीतिक पहचान के रूप में देखा जाता है। सवाल यह उठता है कि जब परिवार के पास अन्य सरकारी आवास भी उपलब्ध हैं, तब भी इस बंगले को लेकर विशेष लगाव क्यों बना हुआ है। इसके पीछे केवल रहने की सुविधा नहीं, बल्कि राजनीतिक विरासत, संगठनात्मक गतिविधियां और वर्षों से जुड़ी भावनात्मक यादें भी अहम मानी जाती हैं।

लालू परिवार के चार बंगलों के बारे में जानिए

लालू परिवार के पास तो वैसे भी चार सरकारी बंगले हैं, चौंकिए नहीं, ये सच है। एक बंगला तो ऐसा है जो बिहार सरकार की कृपा से बचा हुआ है। बारी-बारी से पढ़िए कि वो चार सरकारी बंगले कौन-कौन से हैं।

  • पहला बंगला: पहला बंगला तो 39 हार्डिंग रोड है जो राबड़ी देवी को बतौर नेता प्रतिपक्ष, बिहार विधानपरिषद् अलॉट हुआ है। इसी बंगले में जाने से राबड़ी को परहेज है। राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड के बदले यही बंगला अलॉट हुआ है। लेकिन राबड़ी ने यहां जाने से इनकार कर दिया है।
  • दूसरा बंगला: दूसरा बंगला 1 पोलो रोड है। ये तेजस्वी यादव को बतौर नेता प्रतिपक्ष विधानसभा अलॉट हुआ है। यहीं से तेजस्वी यादव का कैंप ऑफिस चलता है। तेजस्वी अपनी खास मीटिंग्स भी इसी बंगले से करते हैं।
  • तीसरा बंगला: 49 हार्डिंग रोड वाले बंगले में तेज प्रताप यादव रहते हैं। हालांकि ये बंगला उन्हें बतौर हसनपुर विधायक अलॉट किया गया था, जब उन्होंने 2020 में यहां से चुनाव जीता था। लेकिन तेज प्रताप यादव ने जब अपनी पार्टी जन शक्ति जनता दल बनाई और 2025 में महुआ से चुनाव लड़े तो हार गए। ऐसे में अब तेज प्रताप यादव किसी पद पर नहीं हैं, और इस बंगले से सरकार चाहती तो उन्हें बेदखल कर सकती थी। हालांकि सरकार ने उनसे ये बंगला अभी तक वापस नहीं लिया है।
  • चौथा बंगला: पंडारा पार्क रोड, नई दिल्ली में लालू-राबड़ी परिवार के एक सदस्य का बंगला है। ये बंगला पाटलिपुत्र सांसद मीसा भारती का सरकारी आवास है। यानी नई दिल्ली में भी लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए एक सरकारी ठिकाना मौजूद है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय तक किसी एक स्थान से जुड़ाव होने पर वह केवल मकान नहीं रह जाता, बल्कि शक्ति केंद्र और राजनीतिक विरासत का प्रतीक बन जाता है। इसी वजह से 10 सर्कुलर रोड को लेकर चर्चा समय-समय पर तेज होती रहती है। समर्थकों के लिए यह स्थान पार्टी के उत्थान, संघर्ष और कई महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं का गवाह माना जाता है।

इसके अलावा परिवार और पार्टी से जुड़े लोगों का एक बड़ा नेटवर्क वर्षों से इसी पते के आसपास सक्रिय रहा है। नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों की नियमित आवाजाही ने भी इस बंगले को राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाए रखा। यही कारण है कि अन्य सरकारी आवास उपलब्ध होने के बावजूद 10 सर्कुलर रोड का महत्व कम नहीं हुआ है।

हालांकि, सरकारी आवासों को लेकर नियम, पात्रता और आवंटन संबंधी मुद्दे समय-समय पर राजनीतिक बहस का विषय बनते रहे हैं। लेकिन 10 सर्कुलर रोड का मामला केवल आवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार की पहचान, विरासत और प्रभाव से भी जुड़ा हुआ माना जाता है।

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