नई दिल्ली, 01 जून् 2026 । त्विषा मौत मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई नए सवाल सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी पहेली वह सिम कार्ड बना हुआ है, जो घटना के बाद से गायब बताया जा रहा है। इसके साथ ही परिवार के कुछ सदस्यों, खासकर सास की चुप्पी ने भी मामले को और रहस्यमय बना दिया है। कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाए हैं, जिसके चलते जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
त्विषा की मौत मामले में सीबीआई उस मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां कहानी का हर किरदार जांच के दायरे में है और हर जवाब नए सवाल खड़े कर रहा है। सूत्रों की मानें तो 5 दिन की रिमांड पर चल रही त्विषा की सास पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह से पूछताछ में दर्जनों सवाल पूछे जा चुके हैं। कई अहम सवालों पर गिरिबाला सिंह स्पष्ट जवाब नहीं दे सकीं। कुछ सवालों पर लंबी खामोशी भी छाई रही।
- यही वजह है कि एजेंसी अब बयानों के बजाय वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों पर ज्यादा भरोसा कर रही है।
- सूत्र बता रहे हैं कि पूछताछ के दौरान गिरिबाला सिंह ने बस एक थ्योरी रखी कि अबॉर्शन के बाद त्विषा डिप्रेशन में थी, संभव है कि उन्होंने इसी वजह से आत्मघाती कदम उठाया हो।
- गिरिबाला ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। लेकिन, जांच टीम इस दावे को अंतिम सच मानने को तैयार नहीं है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जांच का संवेदनशील हिस्सा
- सूत्रों के मुताबिक, गिरिबाला से सीधे पूछा गया कि एफआईआर में लगाए गए गंभीर आरोपों के बावजूद उनकी भूमिका सीमित क्यों मानी जाए?
- घटना के वक्त घर में कौन मौजूद था?
- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों के निशान आखिर कैसे आए?
- सीबीआई इन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। इस पूरे मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जांच का सबसे संवेदनशील हिस्सा बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी अब केवल मौखिक बयानों पर निर्भर नहीं रहना चाहती। मामले में अलग-अलग पक्षों के बयानों में कथित विरोधाभास सामने आने के बाद डिजिटल साक्ष्यों को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। मोबाइल फोन रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स, चैट हिस्ट्री, लोकेशन डेटा, सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों से प्राप्त जानकारी जांच का प्रमुख आधार बन गई है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल डेटा घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने लाने में अधिक मददगार साबित हो सकता है।
जांचकर्ताओं की नजर विशेष रूप से उस गायब सिम कार्ड पर है, क्योंकि आशंका है कि उसमें ऐसे महत्वपूर्ण संवाद या जानकारी हो सकती है, जो मामले की कड़ियों को जोड़ने में सहायक हो। इसके अलावा घटना से पहले और बाद की डिजिटल गतिविधियों का भी गहन विश्लेषण किया जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित लोगों के बीच किस प्रकार का संपर्क था और घटना के समय उनकी गतिविधियां क्या थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक आपराधिक जांच में डिजिटल फॉरेंसिक की भूमिका लगातार बढ़ी है। कई बार इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य ऐसे तथ्य सामने ला देते हैं, जो प्रत्यक्ष बयानों से स्पष्ट नहीं हो पाते। इसी वजह से जांच एजेंसी कथित तौर पर तकनीकी और डिजिटल प्रमाणों को प्राथमिकता दे रही है ताकि निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित निष्कर्ष तक पहुंचा जा सके।
मामले में अभी कई सवाल अनुत्तरित हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल, गायब सिम कार्ड, पारिवारिक सदस्यों की भूमिका, डिजिटल रिकॉर्ड और घटनाक्रम की समयरेखा जांच के केंद्र में बने हुए हैं।