चंडीगढ़, 21 जुलाई 2026 । अरावली क्षेत्र में अवैध खनन और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए अब आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। हाईकोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए खनन गतिविधियों की निगरानी के लिए सैटेलाइट आधारित 3D मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत खनन क्षेत्रों की नियमित निगरानी की जाएगी और हर छह महीने में 3D मैपिंग के जरिए स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
हाईकोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि खनन स्थलों से संबंधित सैटेलाइट तस्वीरों और अन्य सूचनाओं को सार्वजनिक मंच पर उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार किया जाए, ताकि आम नागरिक भी नियमों के उल्लंघन या अवैध खनन की शिकायत दर्ज करा सकें। अदालत ने केंद्र और हरियाणा सरकार को अगली सुनवाई तक इस संबंध में अपना प्रस्ताव और जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट के निर्देश के बाद संबंधित विभागों को खनन क्षेत्रों की डिजिटल निगरानी, सीमांकन और गतिविधियों की जांच के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेने को कहा गया है। सैटेलाइट इमेज और 3D तकनीक की मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी क्षेत्र में स्वीकृत सीमा से अधिक खनन तो नहीं किया जा रहा है या पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है।
हाईकोर्ट ने अवैध खनन को पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के लिए गंभीर खतरा बताते हुए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया है। कोर्ट का कहना है कि केवल कागजी कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी निगरानी और सख्त कार्रवाई जरूरी है।
नई व्यवस्था के तहत खनन क्षेत्रों की स्थिति का समय-समय पर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे खनन गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध तरीके से किए जा रहे उत्खनन की पहचान करना आसान होगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
खनन माफिया पर लगाम लगाने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सैटेलाइट निगरानी से प्रशासन को वास्तविक समय में जानकारी मिलने में मदद मिलेगी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ सरकारी राजस्व की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।