पटना, 27 जुलाई 2026 । बिहार की राजनीति में उस समय सियासी हलचल तेज हो गई जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर तीखी टिप्पणी की। तेजस्वी के बयान के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया। दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज होने से राज्य का राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
राजनीतिक विफलताओं से बौखलाए तेजस्वी: JDU
जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि तेजस्वी यादव अपनी लगातार राजनीतिक विफलताओं के कारण मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में महज 25 सीटों पर सिमटने के गहरे राजनीतिक आघात से तेजस्वी अब तक उबर नहीं पाए हैं। इसी निराशा और हताशा में वे भाषाई रूप से बेलगाम हो चुके हैं।
एनडीए नेताओं का तेजस्वी पर पलटवार
- भाषा पर लगाम की नसीहत: जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह की अशोभनीय टिप्पणी को जागरूक जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।
- संवैधानिक जिम्मेदारियों से दूरी का आरोप: संतोष कुमार सुमन ने सवाल उठाया कि तेजस्वी पहले ये बताएं कि वे इतने दिनों तक अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों से दूर कहां गायब थे।
- मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश: ‘हम’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि अभद्र भाषा का प्रयोग कर कोई भी नेता अपनी राजनीतिक निष्क्रियता को छिपा नहीं सकता।
तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन के दौरान राज्य सरकार की कार्यशैली और नेतृत्व पर सवाल उठाए। उनके बयान को लेकर NDA के कई नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए व्यक्तिगत टिप्पणियों का सहारा ले रहा है। गठबंधन के नेताओं ने तेजस्वी से सार्वजनिक जीवन में संयमित भाषा का इस्तेमाल करने की भी अपील की।
वहीं, आरजेडी नेताओं का कहना है कि तेजस्वी यादव ने सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों की आलोचना की है, जिसे राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय बयान को मुद्दा बनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए बिहार में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है। ऐसे में नेताओं के बयान और उन पर आने वाली राजनीतिक प्रतिक्रियाएं चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की ओर से और भी तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।