बाब अल-मंदेब के मुहाने तक पहुंचे हूती

रणनीतिक समुद्री रास्ते पर कब्जे का बढ़ा खतरा

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सना, 11 सितंबर 2026।  यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थित बलों के बीच संघर्ष ने अब बेहद रणनीतिक मोड़ ले लिया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक ईरान समर्थित हूती लड़ाके बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बेहद करीब पहुंच गए हैं। यमनी सरकार के सूत्रों के अनुसार हूतियों ने धुबाब कस्बे और रणनीतिक पेरिम द्वीप तक अपनी पहुंच बना ली है।

बाब अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां हूतियों की बढ़ती मौजूदगी ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

पेरिम द्वीप पर कंट्रोल बाब अल-मंदेब पर पकड़ बनाने के लिए बेहद अहम है। इसके ठीक सामने धुबाब शहर है, जहां हूती लड़ाके दाखिल हो गए हैं। बाब अल-मंदेब समुद्र का एक संकरा रास्ता है। यहां कब्जे के बाद आस-पास गुजरने वाले जहाजों पर हमला करना आसान हो जाएगा।

हूती विद्रोही 10 दिनों से यमन के लाल सागर तट पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। वे मोखा समेत कई रणनीतिक इलाकों पर कब्जा कर चुके हैं। अब वे शहर ताइज की ओर बढ़ रहे हैं।

मोखा पर कब्जे के बाद बढ़ी तेजी

हूतियों की यह बढ़त अचानक नहीं हुई है। इससे पहले उन्होंने यमन के पश्चिमी तट पर स्थित रणनीतिक मोखा शहर पर कब्जा किया और इसके बाद लाल सागर के हनीश द्वीपों तक भी पहुंच बनाई। इन घटनाओं के बाद हूतियों की सैन्य गतिविधियां बाब अल-मंदेब की दिशा में बढ़ती दिखाई दी हैं।

सरकार समर्थित यमनी बलों की कुछ जगहों से वापसी ने भी हूतियों को आगे बढ़ने का मौका दिया है। हालांकि, यमनी सरकार ने जवाबी कार्रवाई की तैयारी की बात कही है। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि हूतियों ने पूरे बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण हासिल कर लिया है।

दुनिया के लिए क्यों अहम है बाब अल-मंदेब?

बाब अल-मंदेब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। इसके जरिए लाल सागर से होकर जहाज अदन की खाड़ी और आगे स्वेज नहर की दिशा में जाते हैं। खाड़ी क्षेत्र से यूरोप और एशिया के बीच होने वाले ऊर्जा और अन्य सामान के समुद्री परिवहन के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है।

अगर किसी एक पक्ष का इस जलडमरूमध्य पर मजबूत नियंत्रण स्थापित होता है तो जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ सकता है। इससे समुद्री बीमा लागत, परिवहन समय और वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।

तेल और वैश्विक व्यापार पर असर की चिंता

बाब अल-मंदेब के आसपास हूतियों की बढ़ती सैन्य मौजूदगी ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र पहले से ही गंभीर तनाव से गुजर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण सऊदी अरब को अपने तेल निर्यात के लिए लाल सागर के रास्तों पर अधिक निर्भर रहना पड़ रहा है। ऐसे में बाब अल-मंदेब में नया संकट खाड़ी के तेल व्यापार के लिए और बड़ी चुनौती बन सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका असर कच्चे तेल की कीमतों और समुद्री माल ढुलाई पर पड़ सकता है। कारोबारियों की नजर अब इस बात पर है कि हूतियों की सैन्य बढ़त कितनी आगे जाती है और सरकार समर्थित बल इसका जवाब किस तरह देते हैं।

क्या हूती कर पाएंगे जलडमरूमध्य पर पूरा कब्जा?

फिलहाल हूतियों की बाब अल-मंदेब पर पूर्ण कब्जे की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, धुबाब और पेरिम तक पहुंचना उनके लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बढ़त मानी जा रही है। यमनी सरकार जवाबी अभियान की तैयारी कर रही है, इसलिए आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में संघर्ष और तेज हो सकता है।

यदि लड़ाई बाब अल-मंदेब के आसपास लंबे समय तक जारी रहती है तो इसका असर सिर्फ यमन या पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग पर बढ़ता तनाव वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजारों के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है।

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