नई दिल्ली, 01 जून् 2026 । दिल्ली के मुंडका टोल प्लाजा पर टोल टैक्स बचाने के लिए नंबर प्लेट में हेराफेरी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक कार चालक ने अपनी गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर में बदलाव कर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम को धोखा देने की कोशिश की। इस चालाकी का नतीजा यह हुआ कि टोल कटने और चालान जारी होने की सूचना किसी अन्य वाहन मालिक के पास पहुंचने लगी। मामले की शिकायत मिलने के बाद जांच में खुलासा हुआ कि वाहन की नंबर प्लेट पर जानबूझकर अंक और अक्षरों में बदलाव किया गया था, जिससे कैमरों और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सिस्टम को भ्रमित किया जा सके।
- क्रेटा वाले ने इस बदले नंबर से कई बार मुंडका टोल को बिना टोल टैक्स चुकाए पार किया।
- टोल की चोरी के आरोप में ई-चालान लगातार नेक्सॉन कार वाले के एड्रेस पर पहुंचते रहे।
- जबकि इस पूरे समय पीड़ित की कार उनके घर पर ही खड़ी रही।
- लगातार कई ई-चालान आने पर पीड़ित परेशान हो गए और शिकायत एनएचएआई अधिकारियों से की।
- उन्हें बताया गया कि टोल ना भरने के आरोप में जितने भी ई-चालान सिस्टम ने भेजे हैं, उस पूरे समय उनकी कार तो कभी मुंडका टोल से गुजरी ही नहीं।
- वह घर पर ही खड़ी थी। जिसकी उनके पास वीडियो फुटेज भी है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, टोल प्लाजा पर लगे हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों ने संदिग्ध वाहन की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया। फुटेज और वाहन पंजीकरण रिकॉर्ड के मिलान के दौरान पाया गया कि जिस नंबर पर टोल और ई-चालान दर्ज हो रहे थे, वह वास्तव में किसी दूसरे व्यक्ति के वाहन का था। इससे निर्दोष वाहन मालिक को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ा और उसके नाम पर गलत रिकॉर्ड बनने लगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि फास्टैग और डिजिटल टोलिंग व्यवस्था लागू होने के बाद नंबर प्लेट से छेड़छाड़ के मामले बढ़े हैं। कई बार वाहन चालक किसी अंक को टेप, पेंट या स्टिकर की मदद से बदल देते हैं ताकि कैमरे गलत नंबर पढ़ें और टोल भुगतान से बचा जा सके। हालांकि आधुनिक निगरानी तकनीक और एआई आधारित पहचान प्रणाली ऐसे मामलों को पकड़ने में लगातार सक्षम होती जा रही है।
पुलिस और परिवहन विभाग ने इस घटना को गंभीर अपराध मानते हुए संबंधित वाहन चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नंबर प्लेट में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ मोटर वाहन अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है और दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माना, वाहन जब्ती तथा अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला डिजिटल टोल प्रणाली में पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी की आवश्यकता को भी उजागर करता है।