नियमों को दरकिनार कर जारी हुआ शस्त्र लाइसेंस

मुख्तार अंसारी के करीबी को लाभ पहुंचाने के आरोप में तीन अधिकारियों पर केस

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गाजीपुर, 25  जुलाई 2026 । उत्तर प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। आरोप है कि नियमों की अनदेखी करते हुए बाहुबली मुख्तार अंसारी के एक करीबी व्यक्ति को शस्त्र लाइसेंस जारी किया गया। मामले की जांच में प्रारंभिक स्तर पर प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के संकेत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

मामले में इन सभी पर आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। बताते चले कि इस इसी तरह के आरोप के आधार पर समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी पर भी केस हुआ है। अफजाल अंसारी मुख्तार अंसारी के बड़े भाई हैं। इसके अलावा मुख्तार की पत्नीअफशां अंसारी पर भी शस्त्र लाइसेंस में हेराफेरी के आरोप के बिनाह पर केस दर्ज किया गया है।

516 लाइसेंस के शास्त्रों का भौतिक सत्यापन

कलेक्ट्रेट में शस्त्र अनुभाग के चार बाबू(क्लर्क)के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस मुख्तार अंसारी और उसके घर वालों और अन्य सहयोगियों को जारी 516 लाइसेंस के शास्त्रों का भौतिक सत्यापन कर रही है। इसके लिए एसपी सिटी और एसपी ग्रामीण की अगुवाई में अलग-अलग टीम गठित की गई है। जांच में पता चला की मूल रूप से सैदपुर के रहने वाले मोहम्मद शाहिद 1999 से 2015 तक पुरानी कचहरी मंगल बाजार यूसुफपुर मुहम्मदाबाद में किराए के मकान में रहता था। उसके शस्त्र आवेदन में स्थाई और वर्तमान दोनों पता युसुफपुर मुहम्मदाबाद का था ।

इस मामले में तत्कालीन कोतवाल, लेखपाल और एक अन्य संबंधित अधिकारी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि लाइसेंस जारी करने से पहले आवश्यक सत्यापन, दस्तावेजों की जांच और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जाएगा।

प्रशासन का कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि शस्त्र लाइसेंस जारी करने में किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही। जांच के दौरान रिकॉर्ड, फाइलों और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं जानबूझकर नियमों को नजरअंदाज कर किसी व्यक्ति को अनुचित लाभ तो नहीं पहुंचाया गया।

अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच में किसी भी सरकारी कर्मचारी की संलिप्तता प्रमाणित होती है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शस्त्र लाइसेंस जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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