चमोली, 11 सितंबर 2026। उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसे ने तीर्थयात्रियों को स्तब्ध कर दिया। तप्त कुंड में स्नान के दौरान राजस्थान से आईं दो महिलाओं की मौत हो गई। दोनों महिलाएं करीब 100 श्रद्धालुओं के एक दल के साथ बद्रीनाथ धाम पहुंची थीं। घटना के बाद मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भी चिंता का माहौल बन गया।
बताया जा रहा है कि दोनों महिलाओं ने तप्त कुंड में 108 डुबकी लगाने का संकल्प लिया था। इसी संकल्प को पूरा करने के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी में अत्यधिक गर्म पानी में लगातार स्नान और शारीरिक थकान को हादसे से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
100 सदस्यों के एक दल के साथ धाम आई थी
महिलाएं राजस्थान से श्रीमद् भागवत करवाने बद्रीनाथ धाम पहुंचे 100 सदस्यों के एक दल के साथ धाम आई थी। शुक्रवार सुबह लगभग 5 बजे महिलाएं अमरचंद शर्मा के साथ स्नान के लिए आई थी। अमरचंद शर्मा स्नान कर मंदिर दर्शन के लिए चले गए और महिलाएं तप्त कुंड में स्नान करती रही। तभी ऑक्सीजन की कमी होने के कारण दो महिलाओं की मौत हो गई।
हादसे के बाद धाम में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। सूचना मिलते ही पुलिस और मंदिर प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक दोनों महिलाओं की हालत गंभीर हो चुकी थी। दोनों कुंड के अंदर बेहोशी की हालत में मिलीं। दोनों राजस्थान की रहने वाली थीं ।
पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए शव
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन सक्रिय हुआ। दोनों महिलाओं के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। अधिकारियों की ओर से घटना के कारणों की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद मौत के चिकित्सकीय कारणों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
इस हादसे के बाद बद्रीनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालुओं से धार्मिक आस्था के साथ अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की अपील की जा रही है। खासकर गर्म पानी वाले कुंड में लंबे समय तक स्नान करने से बचना और किसी भी तरह की परेशानी महसूस होने पर तुरंत बाहर निकलना जरूरी है।
तीर्थस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा
बद्रीनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में कुंड और स्नान स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार श्रद्धालुओं को धार्मिक संकल्प पूरा करने के साथ अपनी शारीरिक स्थिति को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
दो महिलाओं की मौत की इस घटना ने एक बार फिर तीर्थस्थलों पर स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों, स्नान की समय-सीमा और निगरानी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। प्रशासन की जांच के बाद यह भी सामने आ सकता है कि घटना के समय वहां क्या सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे।