चंडीगढ़ , 11 सितंबर 2026। पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। पार्टी आगामी चुनाव में किसी एक नेता को पहले से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं करेगी। पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट ने कहा है कि पार्टी सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी और बहुमत मिलने के बाद मुख्यमंत्री का फैसला किया जाएगा।
पायलट की एंट्री से क्या खत्म होगी गुटबाजी
पंजाब कांग्रेस में चन्नी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के बीच लंबे समय से राजनीतिक खींचतान देखी जा रही है। इसी तनाव को कम करने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी बनाया। दोनों गुटों ने सार्वजनिक तौर पर पायलट की नियुक्ति का स्वागत किया था। चन्नी ने इसे पंजाब कांग्रेस के लिए ‘नई उम्मीद’ बताया, जबकि वडिंग ने कहा था कि पार्टी नेता जल्द ही राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ एक साझा मंच पर आएंगे। हालांकि, पायलट की नियुक्ति के बाद भी दोनों गुटों की गतिविधियां अलग-अलग जारी हैं। हाल के दिनों में चन्नी और वडिंग ने अलग-अलग विरोध प्रदर्शन, बैठकें और जनसंपर्क कार्यक्रम किए हैं। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर मतभेद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
चन्नी समर्थकों को क्यों लगा झटका?
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों की उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें 2027 के चुनाव में मुख्यमंत्री पद का चेहरा बना सकती है। चन्नी पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में जालंधर से लोकसभा सांसद हैं। ऐसे में उनके समर्थक लगातार उन्हें पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल किए जाने की उम्मीद कर रहे थे।
लेकिन सचिन पायलट के ताजा ऐलान के बाद फिलहाल चन्नी को चुनाव से पहले CM फेस घोषित किए जाने की संभावना खत्म होती दिख रही है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव के बाद चन्नी मुख्यमंत्री पद की दौड़ से बाहर हो गए हैं। बहुमत की स्थिति में विधायक दल और पार्टी नेतृत्व के स्तर पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी बनी बड़ी चुनौती
पंजाब कांग्रेस लंबे समय से अंदरूनी खींचतान से जूझती रही है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और चन्नी समेत अलग-अलग नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी की चर्चाएं होती रही हैं। हाल में कांग्रेस हाईकमान ने भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया। इस बदलाव को पार्टी के भीतर समन्वय और अनुशासन मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
पायलट ने पंजाब कांग्रेस के सभी नेताओं को साथ लेकर चलने और पार्टी के भीतर सभी पक्षों को हिस्सेदार बनाने पर जोर दिया है। ऐसे में CM फेस घोषित नहीं करने का फैसला भी इसी सामूहिक नेतृत्व की रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
क्या चुनाव के बाद चन्नी बन सकते हैं CM?
CM फेस पहले से घोषित नहीं करने का अर्थ यह नहीं है कि किसी नेता की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है। अगर कांग्रेस चुनाव जीतती है तो मुख्यमंत्री चुनने का फैसला चुनाव परिणाम के बाद किया जाएगा। ऐसे में चन्नी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम पर चर्चा संभव है।
फिलहाल पार्टी ने साफ कर दिया है कि चुनाव से पहले किसी एक नाम पर मुहर नहीं लगेगी। अब असली परीक्षा सचिन पायलट की होगी कि वह गुटबाजी से जूझ रही पंजाब कांग्रेस को कितना एकजुट कर पाते हैं और क्या सामूहिक नेतृत्व की रणनीति पार्टी को चुनावी फायदा दिला पाती है।
राहुल गांधी होंगे चुनावी अभियान का बड़ा चेहरा
सचिन पायलट के मुताबिक पंजाब में कांग्रेस का चुनाव अभियान सामूहिक नेतृत्व में चलेगा और राहुल गांधी इसमें प्रमुख भूमिका निभाएंगे। इसका अर्थ यह है कि चुनावी अभियान को किसी एक राज्य स्तरीय नेता की व्यक्तिगत लोकप्रियता पर निर्भर रखने के बजाय पार्टी के सामूहिक संगठन और राष्ट्रीय नेतृत्व के इर्द-गिर्द तैयार किया जाएगा।
कांग्रेस के लिए यह रणनीति इसलिए भी अहम है क्योंकि पंजाब में आम आदमी पार्टी सत्ता में है और BJP तथा अकाली दल भी चुनावी मैदान में सक्रिय हैं। ऐसे बहुकोणीय मुकाबले में कांग्रेस को अपने संगठन और वोट बैंक को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती होगी।