संगरूर , 11 सितंबर 2026। पंजाब के संगरूर में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के काफिले को रोके जाने के बाद सियासी विवाद तेज हो गया है। बताया गया कि ढिल्लों भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ तूर बंजारा गांव में गुलजार सिंह के परिवार से मिलने जा रहे थे। गुलजार सिंह की मौत के मामले को लेकर पंजाब की राजनीति पहले से ही गरमाई हुई है। इसी दौरान रास्ते में उनके काफिले को विरोध का सामना करना पड़ा।
काफिले में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनप्रीत सिंह बादल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और अश्वनी शर्मा समेत अन्य नेता भी मौजूद थे। भाजपा की ओर से आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों ने वाहनों को घेर लिया और रास्ता रोकने की कोशिश की। पार्टी ने इस घटना को विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताया।
बीजेपी का आरोप
केवल सिंह ढिल्लों ने आरोप लगाया कि उनके काफिले को AAP कार्यकर्ताओं ने घेर लिया था। उनका दावा है कि ये लोग दिल्ली में बैठे अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर काम कर रहे थे। ढिल्लों ने यह भी कहा कि पुलिस घटनास्थल से करीब 100 मीटर की दूरी पर मौजूद थी, लेकिन उसने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया। ल्लों ने इस घटना को अपने ऊपर हमला बताते हुए कहा कि यह केवल किसी एक व्यक्ति या पार्टी पर हमला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला है। BJP ने इस घटना को पंजाब में विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया है।
BJP ने AAP कार्यकर्ताओं पर लगाया आरोप
भाजपा नेताओं का आरोप है कि काफिले को रोकने वालों का संबंध आम आदमी पार्टी से था। केवल सिंह ढिल्लों ने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को पीड़ित परिवार से मिलने से रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है। भाजपा ने पंजाब सरकार और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी ने भाजपा के आरोपों को खारिज कर दिया है। AAP का कहना है कि काफिला रोकने वाले उसके कार्यकर्ता नहीं थे। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि गांव के लोगों ने भाजपा नेताओं के दौरे का विरोध किया था और इसे AAP कार्यकर्ताओं से जोड़ना उचित नहीं है।
गुलजार सिंह की मौत बनी राजनीतिक मुद्दा
काफिला रोके जाने की घटना का सीधा संबंध गुलजार सिंह की मौत को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद से जुड़ा है। गुलजार सिंह ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर सवाल उठाए थे। उनकी मौत के बाद विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा है और मामले की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं।
भाजपा का कहना है कि वह गुलजार सिंह के परिवार से संवेदना जताने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग को लेकर गांव पहुंची थी। वहीं AAP नेता मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि भाजपा इस दुखद घटना को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही थी और ग्रामीणों ने इसका विरोध किया।
पंजाब में चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक तल्खी
पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले BJP और AAP के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। संगरूर की यह घटना भी उसी बढ़ते राजनीतिक तनाव का हिस्सा बन गई है। एक ओर भाजपा इसे विपक्षी नेताओं को रोकने और लोकतांत्रिक अधिकारों में बाधा के तौर पर देख रही है, वहीं AAP इसे ग्रामीणों की नाराजगी और स्थानीय विरोध बता रही है।
फिलहाल दोनों दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे अहम सवाल यही है कि काफिला रोकने वाले लोग कौन थे और उनके राजनीतिक संबंध किससे थे। घटना को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों के कारण मामला और अधिक राजनीतिक रंग ले चुका है।