नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026 । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। मीडिया और सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर अपना इस्तीफा सौंप दिया है। साथ ही, जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन और उससे जुड़े घटनाक्रम को भी इस चर्चा से जोड़ा जा रहा है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है।
इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा- वे कहते थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।
12 साल में पहली बार विरोध के बाद इस्तीफा
2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।
दीपके बोले- कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है
जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके ने कहा- मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी दो और मांगे हैं। हम ऐसे नहीं जाएंगे। कॉकरोच एक बार घुसता है, तो निकलता नहीं। जिन बच्चों ने सुसाइड किया, उनके परिवार को एक करोड़ मुआवजा मिले। पुलिसवालों पर एक्शन हो।
दिल्ली पुलिस अधिकारी याद रखें कि उन्होंने कॉकरोच से पंगा लिया है। हमने तो एक मंत्री का इस्तीफा ले लिया, तो तुम लोग क्या चीज हो। छात्रों पर केस वापस होने चाहिए। भैया, ये लोकतंत्र है। मुझे एक महीने से लोग कहते थे- क्या कर रहे हो, कब तक बैठोगे, ये इस्तीफा नहीं देंगे। ये मनमानी सरकार है, लेकिन हमने कर दिखाया।
वांगचुक बोले- ये लोकतंत्र की जीत
सोनम वांगचुक ने अस्पताल से किए पोस्ट में लिखा- यह लोकतंत्र की जीत है, प्रत्यक्ष लोकतंत्र… सड़कों से मिली जीत। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। CJP और GenZ को बधाई। देश के हर कोने से उठ खड़े होने के लिए सभी नागरिकों को धन्यवाद।
जंतर-मंतर पर हाल में हुए प्रदर्शन के बाद विपक्ष और विभिन्न संगठनों ने शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं, सत्तापक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना सभी का अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस्तीफे से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो इसका असर राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा मंत्रालय के नेतृत्व पर पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर केंद्र सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर बनी हुई है।