हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद में नया मोड़

सीएम धामी ने कांग्रेस पर लगाए नारेबाजी के गंभीर आरोप

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देहरादून, 10 सितंबर2026 । उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर सियासी विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि रैली के दौरान मंच से कथित तौर पर जिहादी नारे लगाए गए थे। धामी ने कहा कि कांग्रेस इन नारों को लेकर चुप्पी साधे हुए है, जबकि शुद्धिकरण की घटना को लेकर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

सीएम धामी ने आगे कहा कि यह अनुष्ठान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के दौरान मंच से जिहादी नारे लगाए जाने के बाद आयोजित किया गया था। विवाद सामने आने के बाद सीएम धामी का पहली बार बयान सामने आया है। जिसमें जिहादी शब्द का इस्तेमाल किया गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की सभा के दौरान कथित धार्मिक नारे लगाए गए थे। उनका आरोप है कि इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की। धामी ने कांग्रेस पर सनातन को बांटने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया और कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था से जुड़े किसी भी मामले को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

हालांकि, कथित नारेबाजी को लेकर लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं बल्कि मुख्यमंत्री और संबंधित पक्षों के दावे के रूप में देखना जरूरी है। इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है।

खड़गे की रैली के बाद हुआ था विवाद

यह पूरा विवाद अगस्त में हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद शुरू हुआ। रैली के बाद कथित तौर पर कुछ लोगों ने मंच पर धार्मिक अनुष्ठान और हवन किया, जिसे कांग्रेस ने ‘शुद्धिकरण’ करार दिया।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई खड़गे की जातिगत पहचान से जुड़ी भेदभावपूर्ण मानसिकता को दर्शाती है। खड़गे ने भी इस घटना पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्होंने रैली में किसी जाति या धर्म के खिलाफ बात नहीं की थी।

कांग्रेस ने इस घटना को लेकर भाजपा और उत्तराखंड सरकार पर लगातार हमला बोला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी दलित नेता की सभा के बाद मंच का कथित शुद्धिकरण किया जाना सामाजिक भेदभाव का गंभीर मामला है।

कांग्रेस की ओर से इस मामले में एफआईआर दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। पार्टी के SC/ST सांसदों ने भी मामले को लेकर आवाज उठाई और राष्ट्रपति को ज्ञापन देने का फैसला किया है।

मामले में दर्ज हो चुकी है FIR

हल्द्वानी के इस विवाद ने अब कानूनी रूप भी ले लिया है। रिपोर्टों के अनुसार एक शिकायत के आधार पर BNS की धाराओं 196 और 299 तथा SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की जांच पुलिस के स्तर पर जारी है।

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने भी मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए पुलिस को स्वतंत्र रूप से जांच करने की बात कही है। राज्य सरकार ने अदालत को निष्पक्ष जांच और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, जैसे CCTV फुटेज, को सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया है।

राहुल गांधी भी उठा चुके हैं मुद्दा

हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी भाजपा और RSS पर निशाना साध चुके हैं। कांग्रेस की ओर से इसे सामाजिक न्याय और दलित सम्मान से जोड़कर उठाया गया है। दूसरी ओर भाजपा और राज्य सरकार ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए घटना के अलग पहलुओं की ओर ध्यान दिलाया है।

सीएम धामी ने हालिया प्रतिक्रिया में कहा कि कांग्रेस के पास खड़गे के अपमान के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों का प्रमाण नहीं है। वहीं, उन्होंने रैली के दौरान कथित नारेबाजी को लेकर कांग्रेस से जवाब मांगा है।

चुनावी माहौल में बढ़ी राजनीतिक गर्मी

उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह विवाद राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों इस मुद्दे को अपने-अपने नजरिए से जनता के सामने रख रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस इसे सामाजिक भेदभाव और दलित सम्मान से जोड़ रही है, वहीं भाजपा की ओर से कथित नारेबाजी और धार्मिक भावनाओं से जुड़े सवाल उठाए जा रहे हैं।

ऐसे में हल्द्वानी का यह विवाद आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति में और ज्यादा चर्चा का विषय बन सकता है। फिलहाल पुलिस जांच और दोनों पक्षों की ओर से सामने आ रहे बयानों के बीच मामले की वास्तविक तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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