सिपला और लुपिन के नाम पर नकली दवाओं का खेल उजागर

FSDA और गाजियाबाद क्राइम ब्रांच की देहरादून में बड़ी कार्रवाई

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देहरादून , 23  जुलाई 2026 । उत्तराखंड के देहरादून में नकली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। आरोप है कि यहां प्रतिष्ठित फार्मा कंपनियों सिपला और लुपिन के नाम पर नकली दवाएं तैयार की जा रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए FSDA (फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) और गाजियाबाद क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी है।

क्या है मामला?

नकली एवं अवैध दवाओं के खिलाफ गाजियाबाद समेत प्रदेश में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस क्रम में एफएसडीए और गाजियाबाद क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने देहरादून की फैक्ट्री पर छापेमारी की। वहां देश की कई प्रतिष्ठित दवा कंपनियों के नाम पर नकली दवाइयों का निर्माण किया जाता पकड़ा गया है। टीम ने देहरादून के देवीपुर न्यू हाइवे रोड परवाल में नकली दवा बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया।

छापेमारी के दौरान प्रारंभिक जांच में सामने आया कि फैक्ट्री में सिप्ला, ल्यूपिन, डॉ. रेड्डीज, एल्डर, माइक्रो, मैनकाइंड, इंटास, एबॉट, सन फार्मा, एरिस्टो, मैक्लियोड्स एवं जाइडस जैसी नामी दवा कंपनियों के नाम और ब्रांड का दुरुपयोग किया जा रहा है। कथित तौर पर नकली दवाइयां तैयार की जा रही हैं।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ लोग नामी दवा कंपनियों के ब्रांड और पैकिंग का इस्तेमाल कर नकली दवाएं बाजार में पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। टीम ने संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी कर दवाओं के सैंपल, पैकिंग सामग्री, लेबल और अन्य दस्तावेजों की जांच की। अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री को परीक्षण के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नकली दवा नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इन दवाओं की सप्लाई किन-किन क्षेत्रों में की जा रही थी। इसके अलावा इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, सप्लायर और विक्रेताओं की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

नकली दवाओं का कारोबार स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जाता है। ऐसी दवाएं मरीजों के इलाज को प्रभावित कर सकती हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती हैं। इसी कारण दवा निर्माण, पैकेजिंग और बिक्री प्रक्रिया में सख्त निगरानी रखी जाती है।

अधिकारियों ने कहा है कि नकली दवाओं के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही दवा बाजार में उपलब्ध संदिग्ध उत्पादों की जांच भी तेज की जा सकती है ताकि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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