स्पोर्ट्स , भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा को लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल की उम्मीदें एक बार फिर चर्चा में हैं। हालांकि सवाल उठ रहे हैं कि क्या नीरज इस बार स्वर्ण पदक जीत पाएंगे या नहीं, लेकिन उनके शानदार रिकॉर्ड और मौजूदा प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें अब भी भारत की सबसे बड़ी पदक उम्मीदों में शामिल किया जा रहा है।
रिपोर्ट में नीरज चोपड़ा को भी गोल्ड का दावेदार नहीं माना गया है। नीरज ने 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। वे ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे हैं। जिन सात खिलाड़ियों को गोल्ड का दावेदार माना जा रहा था, उनमें से एक अरुण कुमार गुरुवार को डोप टेस्ट में फेल हो गया है। नीचे दी गई तस्वीर में बचे दावेदार देख सकते हैं।
नीरज चोपड़ा ने इससे पहले 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में जैवलिन थ्रो का गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा था। वह कॉमनवेल्थ में जैवलिन गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बने थे। वहीं 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में वह चोट के कारण हिस्सा नहीं ले पाए थे, जिससे उनके प्रशंसकों को निराशा हुई थी।
इस बार नीरज के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार बेहतर प्रदर्शन बनाए रखना और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ना होगी। जैवलिन थ्रो में छोटी सी तकनीकी गलती भी परिणाम बदल सकती है। इसके अलावा फिटनेस, मौसम और प्रतियोगिता के दिन प्रदर्शन जैसे कई कारक पदक की राह तय करते हैं।
नीरज चोपड़ा ने हाल के वर्षों में लगातार बड़े मंचों पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने ओलंपिक, वर्ल्ड चैंपियनशिप और डायमंड लीग जैसे आयोजनों में शानदार प्रदर्शन किया है। उनकी व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो 90 मीटर से ज्यादा की है, जो उन्हें दुनिया के शीर्ष जैवलिन खिलाड़ियों में शामिल करती है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए भी नीरज को भारत की गोल्ड मेडल उम्मीदों में प्रमुख नाम माना जा रहा है। भारतीय दल में उनकी मौजूदगी से एथलेटिक्स में पदक की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। हालांकि खेल में जीत पहले से तय नहीं होती और अंतिम फैसला मैदान पर प्रदर्शन से ही होगा।
नीरज चोपड़ा के प्रशंसकों को उम्मीद है कि वह अपने अनुभव, तकनीक और दबाव में शानदार प्रदर्शन करने की क्षमता के दम पर एक बार फिर भारत के लिए गोल्ड मेडल जीत सकते हैं।