पटना, 22 जुलाई 2026 । बिहार में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर आज बड़ा असर देखने को मिल सकता है। स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर OPD (आउट पेशेंट विभाग) सेवाओं का बहिष्कार कर रहे हैं। डॉक्टरों के इस निर्णय के चलते राज्यभर के जिला अस्पतालों, सदर अस्पतालों और अन्य सरकारी चिकित्सा संस्थानों में मरीजों को इलाज के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ में आक्रोश
ये फैसला अरवल के सिविल सर्जन से मारपीट के बाद लिया गया है। सिविल सर्जन डॉक्टर राजकिशोर प्रसाद से मारपीट की इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने पूर्व विधायक महानंद सिंह समेत 12 लोगों के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई गई है। BHSA के महासचिव डॉ रोहित कुमार के अनुसार संघ की तरफ से प्रशासन को 72 घंटे का समय दिया गया, लेकिन प्रशासन ने वो कार्रवाई नहीं की, जिसकी जरूरत थी। इसके बाद OPD बहिष्कार का निर्णय लिया गया।
डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी विभिन्न मांगों और हाल की घटनाओं को लेकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा संघ के अनुसार, लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान, चिकित्सकों की सुरक्षा, कार्यस्थल पर बेहतर सुविधाएं और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर कई बार सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन संतोषजनक समाधान नहीं निकलने के कारण यह कदम उठाया गया है।
हालांकि, संघ ने स्पष्ट किया है कि आपातकालीन सेवाएं, इमरजेंसी, ICU, ट्रॉमा सेंटर, प्रसूति सेवाएं और गंभीर मरीजों का इलाज सामान्य रूप से जारी रहेगा। केवल नियमित OPD सेवाओं का बहिष्कार किया जा रहा है, ताकि आम जनता को न्यूनतम असुविधा हो और गंभीर मरीजों का उपचार प्रभावित न हो।
स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और अस्पताल प्रशासन को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मरीजों से भी अपील की गई है कि सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए अस्पताल जाने से पहले संबंधित संस्थान की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर लें, जबकि गंभीर स्थिति में सीधे आपातकालीन सेवाओं का उपयोग करें।
डॉक्टरों के इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और चिकित्सकों की कार्य परिस्थितियों को लेकर बहस तेज कर दी है। अब सभी की नजर सरकार और स्वास्थ्य सेवा संघ के बीच संभावित बातचीत पर टिकी है, जिससे जल्द समाधान निकल सके और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह सामान्य हो सकें।