चंडीगढ़, 22 जुलाई 2026 । किसान आंदोलन के बीच बड़ी खबर सामने आई है। किसानों ने फिलहाल दिल्ली मार्च रोकने का फैसला लिया है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने जानकारी देते हुए कहा कि उनकी कुछ मांगों को स्वीकार कर लिया गया है और केंद्र सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खुल गया है। उन्होंने यह भी बताया कि कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक को मंजूरी मिल गई है।
किसानों को केंद्र के साथ 10 दिनों के भीतर बैठक का भरोसा
हरियाणा के मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि राज्य सरकार को किसान यूनियनों की ओर से सौंपी गई मांगों का चार्टर मिल गया है और वह इसे विचार के लिए संबंधित अधिकारियों को भेजेगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी से जुड़ा मुद्दा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ उठाया जाएगा और शाम तक उसका समाधान कर दिया जाएगा।
मंत्री ने क्या कहा?
राणा ने आगे कहा कि सरकार एक सप्ताह से 10 दिनों के भीतर किसानों और केंद्र के बीच बैठक की व्यवस्था करेगी। उन्होंने कहा कि हम एक सप्ताह या 10 दिनों के भीतर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, या केंद्र सरकार द्वारा नामित किसी भी व्यक्ति के साथ चर्चा की व्यवस्था करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि बातचीत के जरिए लंबित मुद्दों का समाधान हो जाएगा।
सरवन सिंह पंधेर के अनुसार, सरकार के साथ हुई बातचीत में किसानों की प्रमुख मांगों पर चर्चा हुई और कुछ मुद्दों पर सहमति बनी है। इसके बाद किसानों ने आगे की रणनीति तय करने तक दिल्ली कूच के कार्यक्रम को स्थगित करने का निर्णय लिया। किसान नेताओं का कहना है कि बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश जारी रहेगी।
किसान संगठनों की ओर से लंबे समय से विभिन्न मांगें उठाई जा रही हैं। इनमें कृषि नीतियों, किसानों की आय, फसलों के उचित मूल्य और अन्य कृषि संबंधी मुद्दे शामिल हैं। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार के साथ सकारात्मक बातचीत होने पर ही आगे की दिशा तय की जाएगी।
केंद्र सरकार की ओर से भी किसानों के साथ संवाद बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। शिवराज सिंह चौहान के साथ प्रस्तावित बैठक को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस बैठक में किसानों की लंबित मांगों और उनसे जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
दिल्ली मार्च रोके जाने के बाद फिलहाल सीमा क्षेत्रों पर तनाव कम होने की उम्मीद है। हालांकि, किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि बातचीत में अपेक्षित समाधान नहीं निकलता है तो आंदोलन को लेकर आगे का फैसला लिया जाएगा।