होडल-शोलाका रेलखंड पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग शुरू

ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा दोनों को मिलेगा बड़ा फायदा

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फरीदाबाद/पलवल, 21  जुलाई 2026 । भारतीय रेलवे ने होडल-शोलाका रेलखंड पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली शुरू कर दी है। इस आधुनिक तकनीक के लागू होने से अब एक ही रेल ट्रैक पर निर्धारित और सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए एक साथ कई ट्रेनें संचालित की जा सकेंगी। रेलवे का मानना है कि इससे ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी, परिचालन क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों को समय पर ट्रेन संचालन का लाभ मिलेगा।

क्या है रेलवे का एबीएस सिस्टम

रेल अधिकारियों ने बताया कि ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली (ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग) रेलवे की एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें दो स्टेशनों के बीच ट्रैक को छोटे-छोटे हिस्सों (‘ब्लॉक’) में बांटा जाता है। ट्रेन के आगे बढ़ने पर सिग्नल बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वचालित रूप से लाल या हरे हो जाते हैं। इससे एक ही ट्रैक पर कई ट्रेनें सुरक्षित रूप से एक-दूसरे के पीछे चल सकती हैं

ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली पारंपरिक सिग्नल व्यवस्था की तुलना में अधिक उन्नत मानी जाती है। इसमें ट्रैक पर ट्रेन की वास्तविक स्थिति के आधार पर सिग्नल स्वतः संचालित होते हैं। जैसे ही एक ट्रेन किसी सेक्शन से आगे बढ़ती है, पीछे आने वाली ट्रेन के लिए सिग्नल स्वतः अपडेट हो जाते हैं। इससे ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनी रहती है और परिचालन अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक के लागू होने से रेलखंड की लाइन क्षमता (Line Capacity) में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे व्यस्त रूटों पर ट्रेनों को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक रुकना नहीं पड़ेगा और ट्रैफिक का बेहतर प्रबंधन संभव होगा। इसके अलावा, सिग्नलिंग प्रणाली में आधुनिक सुरक्षा मानकों के इस्तेमाल से मानवीय त्रुटियों की संभावना भी कम होगी, जिससे रेल संचालन और अधिक सुरक्षित बनेगा।

होडल-शोलाका रेलखंड दिल्ली-मथुरा मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री और मालगाड़ियां संचालित होती हैं। ऐसे में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग लागू होने से इस पूरे कॉरिडोर की परिचालन दक्षता बढ़ने की उम्मीद है। रेलवे भविष्य में अन्य व्यस्त रेलखंडों पर भी इसी तरह की आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली लागू करने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि देशभर में रेल नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, तेज और तकनीक आधारित बनाया जा सके।

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