पटना, 21 जुलाई 2026 । शिक्षा विभाग ने स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने और शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एक महीने के भीतर 2,151 शिक्षकों की नियुक्ति पूरी करने का दावा किया है। विभाग का कहना है कि नई नियुक्तियों से सरकारी स्कूलों में लंबे समय से खाली पड़े पद भरने में मदद मिलेगी, जिससे विद्यार्थियों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकेगी। इसके साथ ही शिक्षकों के लिए फॉर्मल ड्रेस कोड को सख्ती से लागू करने का भी निर्णय लिया गया है, ताकि स्कूलों में अनुशासित और पेशेवर वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।
3456 पद स्वीकृत पद में से 2151 रिक्त
अल्पसूचित प्रश्न पूछते पूर्व मंत्री श्याम रजक ने सदन को जानकारी दी कि आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों के 62 प्रतिशत पद रिक्त है हिस्से बच्चों की पढ़ाई बाधित है। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों के लिए 3456 पद स्वीकृत है, लेकिन 1305 शिक्षक ही कार्यरत हैं। यानी कुल 2151 पर रिक्त हैं। साथ ही साथ उन स्कूलों में संगीत के शिक्षक भी नहीं है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, नव नियुक्त शिक्षकों की तैनाती उन स्कूलों में प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है, जहां विषय विशेषज्ञों की कमी लंबे समय से बनी हुई थी। इससे पढ़ाई का स्तर बेहतर होने के साथ-साथ विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों में भी सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को नियुक्ति प्रक्रिया और जॉइनिंग में किसी भी प्रकार की देरी न होने के निर्देश दिए हैं।
ड्रेस कोड को लेकर जारी निर्देशों में कहा गया है कि सभी शिक्षक स्कूल समय के दौरान निर्धारित फॉर्मल परिधान में ही उपस्थित होंगे। इसका उद्देश्य शिक्षकों की पेशेवर पहचान को मजबूत करना, विद्यार्थियों के सामने अनुशासित वातावरण प्रस्तुत करना और स्कूलों में एक समान कार्य संस्कृति विकसित करना है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ड्रेस कोड के पालन की नियमित निगरानी की जाएगी और नियमों की अनदेखी करने पर आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति और अनुशासन से जुड़े सुधारात्मक कदम सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बना सकते हैं। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि केवल नियुक्तियां ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि शिक्षकों के प्रशिक्षण, आधुनिक शिक्षण संसाधनों और आधारभूत सुविधाओं को भी समान रूप से मजबूत करना आवश्यक होगा, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में स्थायी सुधार सुनिश्चित किया जा सके।