गाजियाबाद में हाउस टैक्स बढ़ोतरी पर बढ़ा विवाद, नगरायुक्त और मेयर को कानूनी नोटिस; 15 दिन में मांगा जवाब
गाजियाबाद, 21 जुलाई 2026 । गाजियाबाद में हाउस टैक्स बढ़ोतरी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नागरिक अधिकार मंच ने नगर निगम की कर वृद्धि प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नगरायुक्त और मेयर को कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि हाउस टैक्स में की गई बढ़ोतरी से पहले आवश्यक प्रक्रियाओं, पारदर्शिता और जनहित से जुड़े पहलुओं का पर्याप्त पालन नहीं किया गया। मंच ने दोनों अधिकारियों से 15 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने की मांग की है।
नोटिस में कहा गया है कि 30 जून को विशेष बैठक बुलाकर सभी पार्षदों ने बढ़ा हुआ हाउस टैक्स निरस्त करते हुए पुरानी दरों पर टैक्स वसूली का प्रस्ताव पारित किया था। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन ने उत्तर प्रदेश नगर निगम नियमावली-1960 की धारा-28 का हवाला देकर प्रस्ताव लागू करने से इनकार कर दिया।
नोटिस में हाउस टैक्स निर्धारण के आधार, कर वृद्धि के मानदंड, नागरिकों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव और संबंधित प्रशासनिक निर्णयों की वैधता को लेकर कई प्रश्न उठाए गए हैं। नागरिक अधिकार मंच का कहना है कि कर वृद्धि का निर्णय पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए और आम लोगों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का उचित अवसर मिलना चाहिए। यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो मंच ने आगे कानूनी कार्रवाई करने के संकेत भी दिए हैं।
जवाब नहीं मिलने पर दर्ज कराई जाएगी शिकायत
नोटिस में कहा गया है कि 15 दिन के भीतर जवाब नहीं मिलने पर मंच लोकायुक्त के समक्ष प्रशासनिक कदाचार, वित्तीय अनियमितता, पद के दुरुपयोग, लोकतांत्रिक व्यवस्था के उल्लंघन और जनप्रतिनिधियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की शिकायत दर्ज कराएगा।
दूसरी ओर, नगर निगम प्रशासन का कहना है कि कर निर्धारण और संशोधन की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप की जाती है तथा इसका उद्देश्य शहर में बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। हालांकि, नोटिस मिलने के बाद संबंधित अधिकारी कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं और निर्धारित समय के भीतर अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहे हैं।
हाउस टैक्स बढ़ोतरी का मुद्दा शहर में लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। कई स्थानीय निवासी और सामाजिक संगठन भी कर वृद्धि की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर नगर निगम के आधिकारिक जवाब और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई है, जिससे इस विवाद की दिशा तय होगी।