चंडीगढ़, 08 जुलाई 2026 । पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक मतभेद और गुटबाजी की चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के भीतर एकजुटता कायम करने के लिए वरिष्ठ नेता और पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल लगातार नेताओं से संवाद कर रहे हैं, लेकिन ताजा राजनीतिक घटनाक्रम ने उनकी सुलह की कोशिशों को नई चुनौती दे दी है।
सुखविंदर सिंह रंधावा भी नहीं पहुंचे बैठक
चन्नी के अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह रंधावा भी मंगलवार शाम तक बैठक में नहीं पहुंचे थे। इससे यह संकेत मिलने लगे कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच संगठनात्मक फैसलों को लेकर असहमति बनी हुई है। इस बीच भूपेश बघेल इन दिनों पंजाब दौरे पर हैं और विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने के साथ-साथ पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके कार्यक्रम में चुनाव से जुड़ी विभिन्न समितियों के अध्यक्षों, कार्यकारी अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें शामिल हैं।
सुखविंदर सिंह रंधावा भी नहीं पहुंचे बैठक
चन्नी के अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह रंधावा भी मंगलवार शाम तक बैठक में नहीं पहुंचे थे। इससे यह संकेत मिलने लगे कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच संगठनात्मक फैसलों को लेकर असहमति बनी हुई है। इस बीच भूपेश बघेल इन दिनों पंजाब दौरे पर हैं और विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने के साथ-साथ पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके कार्यक्रम में चुनाव से जुड़ी विभिन्न समितियों के अध्यक्षों, कार्यकारी अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें शामिल हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की हालिया राजनीतिक सक्रियता और उनके रुख को लेकर पार्टी के भीतर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन को लेकर चल रही खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है।
कांग्रेस हाईकमान आगामी चुनावों से पहले पंजाब इकाई में एकजुटता बनाए रखना चाहता है। इसी उद्देश्य से भूपेश बघेल लगातार वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और संगठन पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। हालांकि, हाल के घटनाक्रमों से संकेत मिल रहे हैं कि राज्य इकाई में मतभेद पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पंजाब कांग्रेस के लिए आने वाले चुनावों से पहले संगठनात्मक एकता बेहद अहम होगी। ऐसे में पार्टी नेतृत्व की रणनीति और वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय पर सभी की नजर बनी हुई है।