यूपी सरकार का बड़ा फैसला – सरकारी वकीलों की फीस में बढ़ोतरी, न्यायिक प्रक्रिया को मिलेगी नई मजबूती

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लखनऊ, 06 जून्‌ 2026 ।  उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की न्यायिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सरकारी वकीलों (Government Advocates) की फीस में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से हाईकोर्ट, जिला न्यायालयों तथा विभिन्न न्यायिक मंचों पर सरकार का पक्ष रखने वाले अधिवक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। लंबे समय से फीस संशोधन की मांग कर रहे सरकारी वकीलों के लिए यह निर्णय राहत लेकर आया है।

जिला अधिवक्ताओं को कितना मिलेगा वेतन?

उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव, न्याय उदय प्रताप सिंह की ओर से इस बारे में आदेश जारी किया है। इसके तहत जिला शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनर फीस अब 14,000 रुपये प्रतिमाह और बहस फीस 2,500 रुपये प्रति कार्य दिवस कर दी गई है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ताओं को अब 11,000 रुपये प्रति माह और 2,300 रुपये प्रति दिवस फीस मिलेगी।

सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई फीस से योग्य और अनुभवी अधिवक्ताओं को सरकारी मामलों में बेहतर प्रतिनिधित्व के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे अदालतों में राज्य सरकार के पक्ष को मजबूती से रखा जा सकेगा और मुकदमों के प्रभावी निस्तारण में सहायता मिलेगी। नई व्यवस्था के तहत विभिन्न श्रेणियों के सरकारी अधिवक्ताओं, मुख्य स्थायी अधिवक्ताओं, अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ताओं तथा पैनल वकीलों की फीस और मानदेय में अलग-अलग स्तर पर वृद्धि की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में मुकदमों की बढ़ती संख्या और जटिल कानूनी प्रक्रियाओं को देखते हुए सरकारी वकीलों को उचित पारिश्रमिक देना आवश्यक था। इससे न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि न्यायिक मामलों में सरकार की सफलता दर में भी सुधार देखने को मिल सकता है।

राज्य सरकार का यह कदम न्यायिक प्रशासन को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में बेहतर कानूनी रणनीति तैयार करने और अदालतों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। साथ ही युवा अधिवक्ताओं के लिए भी सरकारी पैनल में शामिल होने के अवसर आकर्षक बनेंगे।

प्रमुख बिंदु

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी वकीलों की फीस बढ़ाने का फैसला किया।
  • हाईकोर्ट और जिला अदालतों में कार्यरत अधिवक्ताओं को लाभ मिलेगा।
  • योग्य वकीलों को सरकारी मामलों में बेहतर प्रतिनिधित्व के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
  • न्यायिक प्रक्रिया की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ने की उम्मीद।
  • लंबे समय से लंबित फीस संशोधन की मांग को सरकार ने स्वीकार किया।
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