रूस का भारत को बड़ा रक्षा प्रस्ताव, पुतिन ने सुखोई-57 फाइटर जेट की पेशकश की; रक्षा सहयोग पर बढ़ी चर्चा

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मॉस्को, 05 जून्‌ 2026 । रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को अत्याधुनिक सुखोई-57  लड़ाकू विमान की पेशकश की है। इस प्रस्ताव ने भारत-रूस रक्षा सहयोग को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। सुखोई-57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ मल्टीरोल फाइटर जेट माना जाता है, जिसे आधुनिक हवाई युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

पुतिन ने गुरुवार को सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के दौरान अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पहले भी भारत को इसे बनाने के प्रोजेक्ट में साझेदार बनने का ऑफर दिया था। उस समय भारत ने कहा था कि रूस पहले इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाए, उसके बाद भारत इसमें शामिल होने पर विचार करेगा।

रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने भारत को केवल विमान खरीदने का विकल्प ही नहीं, बल्कि तकनीकी सहयोग, संयुक्त उत्पादन और रक्षा औद्योगिक साझेदारी जैसे पहलुओं पर भी बातचीत की पेशकश की है। यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो भारत की वायु शक्ति को नई क्षमता मिल सकती है और रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के रणनीतिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं।

सुखोई-57 को उन्नत स्टील्थ तकनीक, सुपरक्रूज़ क्षमता, आधुनिक एवियोनिक्स और लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों के साथ विकसित किया गया है। इसे रूस की सबसे उन्नत लड़ाकू विमान परियोजनाओं में से एक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस विमान का उद्देश्य आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों को चुनौती देना और बहु-भूमिका सैन्य अभियानों में बेहतर प्रदर्शन करना है।

भारत लंबे समय से अपनी वायुसेना के आधुनिकीकरण पर काम कर रहा है। ऐसे में पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को लेकर कई विकल्पों पर चर्चा होती रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े रक्षा सौदे पर निर्णय लेते समय लागत, तकनीक हस्तांतरण, रखरखाव, परिचालन आवश्यकताओं और दीर्घकालिक रणनीतिक हितों जैसे कई कारकों पर विचार किया जाता है।

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का इतिहास काफी पुराना रहा है। भारतीय सशस्त्र बलों में रूसी मूल के कई प्रमुख प्लेटफॉर्म पहले से सेवा में हैं। इसी कारण सुखोई-57 का प्रस्ताव दोनों देशों के रक्षा संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि अभी तक इस प्रस्ताव पर भारत की ओर से कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच होने वाली रक्षा वार्ताओं और तकनीकी चर्चाओं के आधार पर इस प्रस्ताव की दिशा तय होगी। फिलहाल सुखोई-57 को लेकर रणनीतिक और रक्षा विशेषज्ञों के बीच व्यापक चर्चा जारी है।

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