रुद्रप्रयाग , 04 जून् 2026 । उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थस्थल केदारनाथ धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। इसी दिशा में लागू की गई ‘कैरी मी बैक पॉलिसी’ इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य केदारनाथ यात्रा मार्ग और धाम क्षेत्र को प्लास्टिक एवं अन्य कचरे से मुक्त रखना है, ताकि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके।
धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को अब वापसी में 400 से 500 ग्राम क्षमता वाले बैग्स में सूखा कूड़ा भरकर गौरीकुंड तक लाना होगा। जिससे केदारनाथ धाम में अनावश्यक कूड़े इकट्ठा नहीं होगा और स्वच्छता व्यवस्था को बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी। केदारनाथ धाम को स्वच्छ बनाने के लिए नगर पंचायत केदारनाथ द्वारा हीलिंग हिमालयास फाउंडेशन और सुलभ इंटरनेशनल के सहयोग से “कैरी मी बैक पॉलिसी” लागू की गई है।
इस नीति के तहत यात्रियों को यात्रा के दौरान अपने साथ ले जाए गए पैकेज्ड खाद्य पदार्थों, पानी की बोतलों, प्लास्टिक रैपर और अन्य गैर-जैविक कचरे को वापस लाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि यदि प्रत्येक श्रद्धालु अपने द्वारा उत्पन्न कचरे की जिम्मेदारी स्वयं ले, तो धाम और यात्रा मार्ग को स्वच्छ बनाए रखना अधिक प्रभावी हो सकता है।
केदारनाथ धाम समुद्र तल से ऊंचाई पर स्थित एक संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र है, जहां कचरे के निस्तारण की सुविधाएं सीमित हैं। ऐसे में प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट सामग्री का जमा होना पर्यावरण, वन्यजीवों और जल स्रोतों के लिए खतरा बन सकता है। यही वजह है कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन यात्रा को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटन और तीर्थयात्रा के बढ़ते दबाव के कारण ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन चुका है। ‘कैरी मी बैक पॉलिसी’ केवल एक प्रशासनिक निर्देश नहीं, बल्कि जिम्मेदार और सतत पर्यटन की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इससे श्रद्धालुओं में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में जनभागीदारी सुनिश्चित होगी।
प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान स्वच्छता नियमों का पालन करें, प्लास्टिक उपयोग को कम करें और अपने साथ लाए गए सामान के खाली पैकेट, बोतलें तथा अन्य कचरे को निर्धारित स्थानों तक वापस लेकर आएं। इससे केदारनाथ धाम की पवित्रता और प्राकृतिक सुंदरता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।
आने वाले वर्षों में यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो उत्तराखंड के अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों और पर्यटन स्थलों पर भी इसी तरह की पर्यावरणीय नीतियां लागू की जा सकती हैं। ‘कैरी मी बैक पॉलिसी’ को हिमालयी क्षेत्रों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक अभिनव और दूरदर्शी पहल के रूप में देखा जा रहा है।