भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना वेनेजुएला
नई दिल्ली, 22 मई 2026 । होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है। ऐसे वक्त में जब मिडिल ईस्ट के देशों के तेल सप्लाई पर असर पड़ा वेनेजुएला अचानक भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बनकर उभरा है।
एनर्जी ट्रैकिंग डेटा केप्लर के मुताबिक वेनेजुएला ने मई 2026 में सऊदी अरब और अमेरिका दोनों को पीछे छोड़ दिया है। अभी केवल रूस और UAE ही उससे आगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस महीने भारत को वेनेजुएला से होने वाली तेल सप्लाई अप्रैल के मुकाबले करीब 50 फीसदी बढ़ गई है।
अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद वहां के तेल निर्यात पर कुछ ढील दी थी। उसी के बाद अप्रैल से भारत में फिर से वेनेजुएला का तेल आना शुरू हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सप्लाई बाधाओं और महंगे तेल के कारण भारत अपनी ऊर्जा रणनीति में तेजी से बदलाव कर रहा है। ऐसे में भारतीय कंपनियां वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख कर रही हैं। भारत की बड़ी रिफाइनिंग कंपनियां, खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां, वेनेजुएला के भारी क्रूड को प्रोसेस करने में सक्षम हैं। यही वजह है कि वेनेजुएला से आयात में अचानक तेजी देखने को मिली है। ऊर्जा बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब केवल पारंपरिक खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहता और वह अपनी तेल आपूर्ति को विविध बनाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है। इससे भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
9 महीने बाद भारत ने तेल खरीदना शुरू किया
केप्लर डेटा के मुताबिक, मई में अब तक भारत ने वेनेजुएला से करीब 4.17 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा है। अप्रैल में यह आंकड़ा 2.83 लाख बैरल प्रतिदिन था, जबकि उससे पहले लगातार 9 महीने तक भारत ने वेनेजुएला से कोई तेल नहीं खरीदा था।
इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह दो हैं। पहली, मिडिल ईस्ट में युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है। दूसरी, वेनेजुएला का भारी और हाई-सल्फर वाला कच्चा तेल सस्ता पड़ रहा है। रिलायंस जैसी भारतीय रिफाइनरियां इसे प्रोसेस करने में सक्षम हैं, इसलिए उन्होंने खरीद बढ़ा दी।
केपलर के एनालिस्ट निखिल दुबे के मुताबिक भारतीय रिफाइनर लंबे समय से वेनेजुएला के तेल में दिलचस्पी दिखाते रहे हैं क्योंकि यह सस्ता है और भारत की जटिल रिफाइनिंग प्रणाली के अनुकूल है। खास तौर पर गुजरात में रिलायंस की रिफाइनरी इस तेल के लिए काफी उपयुक्त मानी जाती है।