‘गिरगिटी भाषा’ पर सियासी संग्राम—CM योगी के बयान पर अखिलेश यादव का तीखा पलटवार
उत्तर प्रदेश, 02 मई 2026 । उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘गिरगिट’ वाले बयान पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने जोरदार पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री खुद “गिरगिटी भाषा” बोलते हैं। इस बयान के बाद सियासी माहौल और गरमा गया है।
शुक्रवार को लखनऊ में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यादव ने कहा, “सच तो यह है कि महिला आरक्षण विधेयक पहले ही पारित हो चुका है, भले ही भाजपा ऐसा नहीं चाहती थी।” उन्होंने कहा, ”चूंकि परिसीमन के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल एकजुट थे, इसलिए भाजपा की साजिश (महिलाओं के साथ धोखा करने की) बेनकाब हो गई। इसीलिए, अपनी हार को छिपाने के लिए, वे बस महिलाओं (आरक्षण) के मुद्दे को जिंदा रखना चाहते हैं।” यादव ने कहा कि वे ‘नारी वंदन’ को महज एक ‘नारा’ बनाकर रखना चाहते हैं।”
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार अपने बयानों और नीतियों में बार-बार बदलाव करती है, जिससे जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने कहा कि एक ही मुद्दे पर अलग-अलग समय पर अलग-अलग बयान देना सरकार की कार्यशैली को दर्शाता है। वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब इस तरह की राजनीति को समझ चुकी है और इसका जवाब चुनाव में देगी।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने अखिलेश यादव के इस बयान को राजनीतिक हताशा करार दिया है। उनका कहना है कि विपक्ष मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की तीखी बयानबाजी आम हो जाती है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर जनता का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश करते हैं। हालांकि, इस तरह के बयान कई बार मुद्दों से ध्यान हटाकर व्यक्तिगत आरोपों तक सीमित हो जाते हैं।
इस विवाद ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में शब्दों की जंग कितनी तेज हो चुकी है। आने वाले समय में यह बयानबाजी और तेज हो सकती है, खासकर जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे।