यौन शोषण मामले में बरी होने के बाद बृजभूषण सिंह की पहली प्रतिक्रिया, फैसले पर जताया संतोष
गोण्डा, 03 अगस्त 2026 । यौन शोषण मामले में अदालत से बरी होने के बाद पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा, “होइहि सोइ जो राम रचि राखा”, और अदालत के फैसले पर संतोष व्यक्त किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पहले भी भरोसा था और आज भी पूरा विश्वास है।
उन्होंने कहा कि लगभग तीन साल बाद कोर्ट ने मुझे और विनोद जी को बरी किया है। मैं 15-16 साल से संघर्ष देख रहा हूं। बृजभूषण शरण ने कहा कि मैं हमेशा कमजोर, जिनका हक मारा जाता था, उनके पक्ष में खड़ा होता है। अपने आप पर विश्वास था। सामने वाले के दिल में क्या है, ये नहीं जानता था। मैंने खुद कभी अपराधी महसूस नहीं किया।
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि मेरी बात सत्य पाई गई। इस साजिश में पहलवानों के अलावा देश की लगभग लेफ्ट-राइट, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी सभी थे। एक दो पार्टियों को छोड़कर सब पीछे पड़ गई। अब उन्हें अपने गिरेबां में झांकना चाहिए कि उनका प्रोटेस्ट कहां तक जायज था। वो तो उसी दिन पकड़कर फांसी पर चढ़वाना चाहते थे। कमजोर और जूनियर खिलाड़ियों की लड़ाई लड़ रहे थे, उसी कारण मेरे ऊपर आरोप लगा। बड़े सोचे समझे बड़ी पार्टियों और नेताओं के अंदर माद्दा नहीं। कभी महिलाओं के पीछे, कभी जेन-Z के पीछे खड़े होकर आंदोलन खड़ा कर रहे हैं।
बृजभूषण सिंह ने कहा कि उन्होंने पूरे मामले के दौरान न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया और अदालत के निर्णय का धैर्यपूर्वक इंतजार किया। उन्होंने इसे सत्य की जीत बताते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के बाद जो फैसला आया है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने पूरे मामले के दौरान उनका साथ दिया।
इस मामले में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर अपना निर्णय सुनाया। फैसले के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां समर्थक अदालत के फैसले का स्वागत कर रहे हैं, वहीं कुछ पक्षों ने निर्णय पर अपनी असहमति भी जताई है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत के फैसले का सम्मान करना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है। यदि किसी पक्ष को निर्णय पर आपत्ति हो, तो कानून के तहत उपलब्ध अपील की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। फिलहाल यह मामला एक महत्वपूर्ण कानूनी और राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।