विजन 2047 के तहत बड़ा फैसला: हरियाणा में रात में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस छोड़ेगी घर

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चंडीगढ़, 30 अप्रैल 2026 । महिला सुरक्षा को लेकर हरियाणा सरकार ने एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक कदम उठाने के संकेत दिए हैं। विजन 2047 के तहत मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि रात के समय काम करने वाली महिलाओं को सुरक्षित घर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिसमें जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद ली जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘डायल 112’ की सुविधा को और सुदृढ़ किया जाएगा तथा नए वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि डिजिटल अपराधों को रोकने के लिए बैंक कर्मचारी ‘क्राइम सेल’ में बैठेंगे; जब भी उन्हें किसी अपराध के संबंध में कोई कॉल प्राप्त होगी, तो संबंधित बैंक खाते को तत्काल बंद कर दिया जाएगा, जिससे अपराध पर अंकुश लगेगा। बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देते हुए, इस संबंध में जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे, साथ ही परामर्शदाताओं (Counselors) की भी नियुक्ति की जाएगी।

इस प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, खासकर औद्योगिक क्षेत्रों, कॉल सेंटर, फैक्ट्रियों और अन्य रात्रि पाली (नाइट शिफ्ट) में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा प्राथमिकता होगी। कई मामलों में देखा गया है कि देर रात घर लौटते समय महिलाओं को असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह पहल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने और सुरक्षित माहौल प्रदान करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

सरकार का फोकस केवल एस्कॉर्ट सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने पर है। इसमें महिला हेल्पलाइन को सक्रिय करना, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाना, CCTV निगरानी को मजबूत करना और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र (Quick Response System) विकसित करना शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम महिलाओं की कार्य भागीदारी को बढ़ाने में मदद करेगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां नाइट शिफ्ट अनिवार्य होती है। साथ ही, इससे कंपनियों और संस्थानों को भी अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाया जा सकेगा।

हालांकि, इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए संसाधनों, पुलिस बल की उपलब्धता और समन्वय की चुनौती भी सामने आ सकती है। सरकार ने अधिकारियों से इस दिशा में विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने और जल्द लागू करने को कहा है।

यदि यह पहल प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है और देशभर में महिला सुरक्षा के नए मानक स्थापित कर सकती है।

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