मुंबई, 15 जून् 2026 । ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते की खबरों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल पैदा कर दिया है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। निवेशकों को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होने से पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थिरता बढ़ेगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले जोखिम कम होंगे। इसी उम्मीद के चलते शेयर बाजार में खरीदारी बढ़ी और प्रमुख सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई।
रियल्टी, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज और बैंकिंग शेयर्स में सबसे ज्यादा खरीदारी हुई। इधर, होर्मुज स्ट्रेट को खोले जाने की खबर के चलते ब्रेंट क्रूड यानी कच्चे तेल के दाम में आज 4% की गिरावट है। यह $83 प्रति बैरल पर आ गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान-अमेरिका संबंधों में सुधार की संभावना का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। यदि क्षेत्रीय तनाव कम होता है और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिम घटते हैं, तो तेल बाजार में स्थिरता आ सकती है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जाता है, क्योंकि इससे आयात लागत और महंगाई पर दबाव कम हो सकता है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने से विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है। इसके चलते बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, आईटी, मेटल और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों ने वैश्विक अनिश्चितताओं में कमी को बाजार के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में लिया।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसी भी संभावित समझौते के वास्तविक प्रभाव का आकलन उसके आधिकारिक स्वरूप और शर्तों के सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा। फिलहाल बाजार में सकारात्मक भावना बनी हुई है और निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता से जुड़ी आगे की घटनाओं पर टिकी हुई है।