नई दिल्ली , 19 मार्च 2026 । महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए Delhi Police को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि रात के समय महिलाओं की गिरफ्तारी करना कानून के खिलाफ है, जब तक कि विशेष परिस्थितियों में उचित प्रक्रिया का पालन न किया जाए।
द्वारका कोर्ट ने स्थानीय पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए एक महिला को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। यह आदेश तब आया, जब बचाव पक्ष की ओर से पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज से महिला की गिरफ्तारी के समय में विसंगति सामने आई, जिससे यह उजागर हुआ कि रात के समय हिरासत में लेने के लिए अनिवार्य कानूनी सुरक्षा उपायों का पालन नहीं किया गया था।
यह आदेश 16 मार्च को ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट हर्षल नेगी ने छावला पुलिस थाने में हत्या के अपराध के लिए दर्ज FIR नंबर 91/2026 के संबंध में पारित किया। जहां अदालत ने सह-आरोपी सुमन यादव और विक्रम यादव के लिए पुलिस को दो दिन की रिमांड दी, वहीं अन्नू यादव की गिरफ्तारी पर सवाल उठ गए।
कोर्ट ने तुरंत रिहा करने का आदेश जारी किया
अदालत ने अन्नू यादव की गिरफ्तारी को ‘गैर-कानूनी और कानून की नजर में अमान्य’ घोषित करते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। सुमन और विक्रम यादव अभी भी रिमांड में हैं, क्योंकि पुलिस अपराध में इस्तेमाल हथियार, लापता DVR और दो अन्य फरार संदिग्धों की तलाश में लगी हुई है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि महिलाओं की गिरफ्तारी से जुड़े नियमों का पालन अनिवार्य है। सामान्य परिस्थितियों में सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले महिलाओं को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। यदि अत्यंत जरूरी स्थिति हो, तो इसके लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति और महिला पुलिसकर्मी की मौजूदगी आवश्यक होती है।
कोर्ट ने Delhi Police को निर्देश दिया कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही न हो और सभी पुलिसकर्मियों को संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी और कानून के पालन को मजबूती मिलेगी।