पटना, 22 जुलाई 2026 । बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के बीच राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इसी बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। भाजपा के एक पुराने और वरिष्ठ नेता ने दोबारा पार्टी का दामन थामते हुए ‘घर वापसी’ कर ली है। इस घटनाक्रम को उपचुनाव से ठीक पहले भाजपा के लिए संगठनात्मक मजबूती और जन सुराज के लिए राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
बीजेपी नेता रहे सुधीर शर्मा की घर वापसी
जी हां,आज जिस नेता की घर वापसी और जनसुराज से मोहभंग होने वाला है, उनका नाम सुधीर शर्मा है। ये बीजेपी के नामवर नेताओं में शुमार किए जाते थे। शुरुआत में ये तब चर्चा में आए जब भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष थे। फिर इनके तेज-तर्रार और बिहार राजनीति की समझ को देखते बीजेपी का प्रवक्ता भी बनाया गया था। देखते-देखते बीजेपी के महासचिव भी बने। मगर, बाद में एक बयान के कारण इन्हें बीजेपी से छह वर्ष के लिए निष्काषित कर दिया गया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी मुकाबले के बीच किसी अनुभवी नेता की वापसी स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा सकती है। साथ ही, यह संदेश भी जाता है कि भाजपा अपने पुराने नेताओं और संगठन को फिर से एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है। दूसरी ओर, जन सुराज के लिए यह घटनाक्रम चुनाव प्रचार के दौरान नई चुनौती खड़ी कर सकता है।
बांकीपुर सीट पर उपचुनाव को लेकर सभी प्रमुख दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं। जनसंपर्क अभियान, चुनावी सभाएं और रणनीतिक बैठकों का दौर लगातार जारी है। ऐसे में नेताओं के दल बदलने और नई राजनीतिक घोषणाओं का असर चुनावी समीकरणों पर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।
हालांकि, राजनीतिक दलों का कहना है कि अंतिम फैसला मतदाता ही करेंगे। चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में विकास, स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों की साख अहम भूमिका निभाएगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता की घर वापसी का बांकीपुर उपचुनाव के परिणामों पर कितना प्रभाव पड़ता है।