शिक्षक की बेरहमी CCTV में कैद

9वीं के छात्र को लैब में बंद कर पीटने का आरोप; हालत गंभीर

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लुधियाना , 22  जुलाई 2026 । एक स्कूल में शिक्षक द्वारा छात्र के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना का CCTV फुटेज सामने आने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया है। आरोप है कि एक शिक्षक ने 9वीं कक्षा के छात्र को स्कूल की लैब में बंद कर उसके साथ बेरहमी से मारपीट की, जिसके बाद छात्र की हालत गंभीर बताई जा रही है।

पुलिस के हाथ लगा CCTV फुटेज

स्कूल प्रबंधन के दावों की धज्जियां उड़ाता एक सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी पुलिस के हाथ लगा है, जिसमें आरोपी शिक्षक की पूरी दरिंदगी कैमरे में कैद हो चुकी है। वीडियो फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि शिक्षक अनिल कुमार अग्रवाल मासूम प्रांशु को उसकी गर्दन (Collar) से दबोचकर जबरन घसीटते हुए लैब के भीतर ले जाता है। लैब में ले जाते ही बिना कोई बात किए या सफाई मांगे, शिक्षक छात्र पर ताबड़तोड़ थप्पड़ों की बरसात कर देता है। वीडियो में दिख रहा है कि शिक्षक लगातार 5-6 जोरदार थप्पड़ मारता है, फिर उसे खींचकर कमरे के दूसरे कोने में पटक देता है। जब मासूम खुद को बचाने के लिए हाथ जोड़ता है और छुपने की कोशिश करता है, तो शिक्षक उसे जमीन पर नीचे दबाकर दोबारा बेरहमी से पीटना शुरू कर देता है।

जानकारी के मुताबिक, घटना के बाद छात्र को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। परिजनों ने शिक्षक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल में बच्चे की सुरक्षा की जिम्मेदारी होने के बावजूद उसके साथ इस तरह का व्यवहार किया गया, जो बेहद चिंताजनक है।

CCTV फुटेज सामने आने के बाद पुलिस और शिक्षा विभाग ने मामले का संज्ञान लिया है। अधिकारियों की ओर से पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि छात्र के साथ मारपीट किन परिस्थितियों में हुई और इसमें कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं।

वहीं, स्कूल प्रशासन की ओर से भी मामले को लेकर जांच में सहयोग की बात कही गई है। यदि जांच में शिक्षक पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं, तो उसके खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

यह घटना एक बार फिर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, अनुशासन के नाम पर हिंसा और शिक्षकों की जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों के साथ किसी भी तरह की शारीरिक हिंसा स्वीकार्य नहीं है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है।

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