गयाजी, 18 जुलाई 2026 । केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के एक बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, “बेकार है भगवान का नाम… मैं पूजा-पाठ नहीं करता।” उनके इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
‘बेकार है भगवान का नाम…’
केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भगवान और पूजा-पाठ को लेकर एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा, ‘बेकार है भगवान का नाम.. पूजा करना और ये सब करना। जो माता-पिता का प्रणाम नहीं किया, उनका पूजा नहीं किया तो दुनिया को दिखाने के लिए और अपनी संतुष्टि के लिए। देखिए इस दुनिया में भगवान को लोग मानते हैं। हम सही में पूजा-पाठ नहीं करते हैं। भगवान को देखा नहीं है इसलिए हम सुनते हैं, इस दुनिया में भगवान को लोग मानते हैं। हम सही में पूजा-पाठ नहीं करते हैं। भगवान को देखा नहीं है इसलिए हम सुनते हैं। लेकिन माता-पिता तो साक्षात् भगवान ब्रह्मा, विष्णु जो भी कहिए हैं।’
मांझी ने अपनी बात रखते हुए व्यक्तिगत आस्था और सोच का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका विश्वास कर्म और मानव सेवा में अधिक है तथा वे पारंपरिक पूजा-पाठ में विश्वास नहीं रखते। उनके इस बयान को कई लोगों ने व्यक्तिगत विचार बताया, जबकि कुछ राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इसकी आलोचना भी की।
बयान के बाद सोशल मीडिया पर समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष सक्रिय हो गए हैं। एक वर्ग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत विश्वास का मामला बता रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान अक्सर राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करते हैं और सार्वजनिक बहस का विषय बन जाते हैं।
फिलहाल इस बयान को लेकर चर्चा जारी है। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जबकि जीतन राम मांझी की ओर से अपने बयान के संदर्भ में आगे कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण आता है या नहीं, इस पर भी नजर बनी हुई है।