पटना, 09 जुलाई 2026 । बिहार पुलिस में 200 से अधिक सिपाहियों का प्रमोशन हिंदी विषय की अनिवार्य परीक्षा में असफल रहने के कारण फिलहाल अटक गया है। बताया जा रहा है कि कई अभ्यर्थियों ने हिंदी लेखन में बिंदी, मात्राओं, वर्तनी और व्याकरण से जुड़ी ऐसी गलतियां कीं, जिनकी वजह से वे निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर सके।
हिंदी में 200 से ज्यादा सिपाही फेल
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राज्यभर में सिपाही से एएसआई बनने की प्रमोशन परीक्षा का आयोजन किया गया था। लिखित परीक्षा हुई। इस परीक्षा में 200 से ज्यादा सिपाही हिंदी में फेल हो गए। लिखित एग्जाम में कोई सिपाही मैं और में अंतर नहीं कर पाया तो कोई हैं और है। नतीजा जब जारी हुआ तो 391 सिपाही फेल हो गए। इनमें 200 से ज्यादा केवल हिंदी में फेल थे। ये सिपाही अब एएसआई नहीं बन सकेंगे। इन्हें बिहार पुलिस विभाग ने अयोग्य करार दे दिया है।
परीक्षा में पास हुए कुल 1545 सिपाही
मिली जानकारी के मुताबिक, बिहार में सिपाही के प्रमोशन के लिए हुई परीक्षा में कुल 1545 सिपाही पास हुए हैं। अब इन सभी का प्रमोशन होगा। ये सभी सिपाही एएसआई के पद पर प्रमोट होकर काम करेंगे। बता दें, प्रमोशन के लिए विभागीय स्तर पर हिन्दी की परीक्षा उतीर्ण होना अनिवार्य है।
विभागीय नियमों के अनुसार, पदोन्नति के लिए हिंदी भाषा की परीक्षा पास करना अनिवार्य है। परीक्षा का उद्देश्य पुलिसकर्मियों की आधिकारिक पत्राचार, रिपोर्ट लेखन और प्रशासनिक कार्यों में भाषा संबंधी दक्षता सुनिश्चित करना है। अधिकारियों के मुताबिक, बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भाषा संबंधी त्रुटियों के कारण सफल नहीं हो पाए, जिससे उनके प्रमोशन की प्रक्रिया फिलहाल रुक गई है।
इस मामले के सामने आने के बाद विभागीय परीक्षाओं में भाषा दक्षता और प्रशिक्षण की आवश्यकता पर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों के लिए भाषा कौशल प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता और प्रभावी संवाद के लिए महत्वपूर्ण है।
पुलिस विभाग की ओर से भविष्य में प्रशिक्षण और पुनर्परीक्षा जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है, हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित विभाग द्वारा ही लिया जाएगा।