नई दिल्ली, 03 जुलाई 2026 । दिल्ली सरकार ने राजधानी में बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के कामकाज और वित्तीय मामलों की समीक्षा के लिए भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से ऑडिट कराने का आदेश जारी किया है। सरकार ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि ऑडिट प्रक्रिया पूरी कर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
सीएजी ऑडिट पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि बिजली वितरण कंपनियों के खाते का सीएजी ऑडिट पावर इन्फ्रा के क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दिल्ली के पावर कंस्यूमर्स और टैक्स पेयर्स की जीत है। उन्होंने कहा कि पावर सेक्टर के निजीकरण के बाद कई साल तक वित्तीय निर्णय, व्यवस्थाएं और लगातार बढ़ती देनदारियों की कभी जांच नहीं हो सकी थी। 10-11 साल तक सत्ता में रही आम आदमी पार्टी ने व्यवस्थाओं की जांच करने के बाद उसे संरक्षण दिया।
दिल्ली के लोगों की सच्चाई का पता चलेगा: आशीष सूद
सूद ने कहा कि जो काम पिछली सरकारे नहीं कर पाई, उसे बीजेपी सरकार ने महज कुछ महीनों में ही कर दिखाया है। दिल्ली के लोगों को यह जानने का पूरा हक है कि कुछ सौ करोड़ रुपये का रेगुलेटरी एसेट्स बढ़कर 38,000 करोड़ रुपये कैसे हो गया? इसका लाभ किसे मिला और लोगों पर इसका बोझ क्यों? उन्होंने कहा कि बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियों से यह अपेक्षा है कि वह पर्याप्त रेकॉर्ड सीएजी को उपलब्ध कराएं, ताकि ऑडिट का काम तेजी से हो सके।
सरकार का कहना है कि इस ऑडिट का उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों के वित्तीय प्रबंधन, परिचालन व्यवस्था, राजस्व, खर्च और उपभोक्ताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पारदर्शी समीक्षा सुनिश्चित करना है। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने और बिजली व्यवस्था को अधिक जवाबदेह एवं प्रभावी बनाने की दिशा में निर्णय लिए जा सकते हैं।
इस फैसले के बाद बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता हितों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। संबंधित विभागों और कंपनियों को ऑडिट प्रक्रिया में आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि इस पहल से बिजली क्षेत्र में सुशासन और वित्तीय अनुशासन को और मजबूती मिलेगी।