बिहार की राजनीति में फिर गरमाया पुराना मुद्दा: ‘निरक्षर पत्नी को मुख्यमंत्री’ वाले बयान से तेज हुई नई सियासी बहस
पटना, 03 जुलाई 2026 । बिहार की राजनीति में एक बार फिर पुराने राजनीतिक मुद्दों को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं द्वारा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और उसके नेतृत्व पर निशाना साधते हुए राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पुराने फैसले का मुद्दा फिर उठाया गया है। इसी क्रम में “अपनी निरक्षर पत्नी को मुख्यमंत्री बना दिए” जैसे बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है।
लालू के पुराने सियासी फैसले पर अब सवाल
बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने लालू यादव के पुराने कार्यकाल की याद दिलाते हुए उन पर परिवारवाद और भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में सजा मिलने के बाद जेल जाते समय लालू यादव को राज्य के किसी योग्य नेता पर भरोसा नहीं था। यही वजह थी कि उन्होंने अपनी निरक्षर पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया, जबकि उन्हें ठीक से अपना नाम तक लिखना नहीं आता था।
बीजेपी का आरोप है कि यह फैसला योग्यता के बजाय राजनीतिक परिस्थितियों और पारिवारिक नेतृत्व को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था। वहीं, आरजेडी और उसके नेताओं ने ऐसे बयानों का विरोध करते हुए इन्हें राजनीतिक हमला और व्यक्तिगत टिप्पणी करार दिया है। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का सम्मान किया जाना चाहिए।
पुरानी जिन्न क्यों बाहर ला रही बीजेपी?
- संजय सरावगी ने लालू प्रसाद यादव को देश के सबसे बड़े घोटाले का दोषी और सजायाफ्ता करार दिया।
- पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को पूरी तरह निरक्षर बताते हुए कहा कि उन्हें हस्ताक्षर करना भी नहीं आता था।
- तेजस्वी की राजनीतिक गंभीरता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता उनको पूरी तरह खारिज कर चुकी है।
- बांकीपुर उपचुनाव को देखते हुए बीजेपी एक बार फिर राजद के पुराने शासनकाल के मुद्दों को हवा दे रही है।
इस बयान के बाद बिहार में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए पुराने राजनीतिक मुद्दों और फैसलों को फिर से चर्चा में लाकर विभिन्न दल अपने-अपने समर्थक वर्ग को साधने की कोशिश कर रहे हैं।