30 बच्चों से दुष्कर्म के दोषी को लेकर ब्रिटेन-पाकिस्तान में विवाद, पुराने मामले ने फिर खड़े किए सवाल

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लंदन, 18 अगस्त 2026 । ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच एक ऐसे शख्स को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिस पर बच्चों के यौन शोषण के गंभीर आरोप और दोषसिद्धि का मामला सामने आया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपी को ब्रिटेन में नाबालिगों के यौन शोषण के मामले में दोषी ठहराया गया था और सजा पूरी करने के बाद उसे पाकिस्तान भेज दिया गया था। बाद में पाकिस्तान में भी उस पर बच्चों के यौन शोषण के गंभीर आरोप लगे।

ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच एक यौन अपराधी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। शाबिर अहमद ब्रिटेन के कुख्यात ग्रूमिंग गैंग से जुड़ा हुआ है। उसे 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी पाया गया है।

शाबिर मूल रूप से पाकिस्तान का रहने वाला है लेकिन उसके पास ब्रिटिश नागरिकता है। अब ब्रिटेन शाबिर को पाकिस्तान भेजना चाहता है, लेकिन इस्लामाबाद ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

पाकिस्तान ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि अगर शाबिर को रखने का दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों को वापस लेने, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर फिर से विचार कर सकता है।

मामला उस समय और गंभीर हो गया जब पाकिस्तान पुलिस ने दावा किया कि आरोपी ने देश में करीब 30 बच्चों के साथ दुष्कर्म करने की बात कबूल की है। पुलिस के अनुसार, वह एक नाबालिग से कथित दुष्कर्म और घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया था। जांच में उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जानकारी सामने आई।

रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी पहले ब्रिटेन में बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी एक संस्था के साथ काम करता था। वहीं, ब्रिटेन में नाबालिगों के यौन शोषण के मामले में दोषी पाए जाने के बाद उसे जेल की सजा भुगतनी पड़ी और बाद में निर्वासित कर दिया गया। इटली में भी उसके खिलाफ इसी तरह के आरोप और कार्रवाई का उल्लेख सामने आया है।

पाकिस्तान में गिरफ्तारी के बाद यह सवाल भी उठा कि ब्रिटेन और इटली से निर्वासन के बाद आरोपी पाकिस्तान में कैसे स्वतंत्र रूप से रह रहा था और उसे संवेदनशील पदों पर काम करने का अवसर कैसे मिला। रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि वह चार्टर्ड अकाउंटेंट था और एक समय खैबर पख्तूनख्वा सरकार के लिए सलाहकार के तौर पर काम कर रहा था।

इस मामले ने दोनों देशों की आपराधिक रिकॉर्ड साझा करने की व्यवस्था, निर्वासित अपराधियों की निगरानी और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर ऐसे व्यक्ति के मामले में, जिसका पहले से बच्चों के खिलाफ अपराध का रिकॉर्ड रहा हो, उसकी निगरानी और पृष्ठभूमि की जांच को लेकर सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

मामले का सबसे चिंताजनक पहलू बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है। यदि किसी आरोपी का पहले से ऐसा आपराधिक इतिहास मौजूद हो, तो संबंधित एजेंसियों के बीच सूचनाओं का समय पर आदान-प्रदान और प्रभावी निगरानी बेहद जरूरी हो जाती है। हालांकि, पुराने मामले में सामने आए पुलिस दावों और आरोपों को न्यायिक निष्कर्षों से अलग रखकर देखा जाना चाहिए।

ब्रिटेन-पाकिस्तान के बीच यह विवाद अब केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाल सुरक्षा, निर्वासन के बाद अपराधियों की निगरानी और देशों के बीच आपराधिक सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है।

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