इजरायल से रिश्तों पर सियासी घमासान: मौलाना कल्बे जव्वाद ने बीजेपी पर साधा निशाना,
बहराइच, 15 जून् 2026 । शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने भारत-इजरायल संबंधों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जिस तरह इजरायल के साथ अपने संबंधों को उपलब्धि के रूप में पेश करती है, वह वास्तविकता से परे है। मौलाना का दावा है कि भारत और इजरायल के बीच कूटनीतिक संबंधों की नींव कांग्रेस सरकारों के दौरान रखी गई थी और मौजूदा सरकार उसी नीति को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने बीजेपी को “कांग्रेस की शागिर्द” बताते हुए कहा कि विदेश नीति के कई मुद्दों पर दोनों दलों की सोच में बहुत बड़ा अंतर नहीं दिखाई देता।
बीजेपी ने अटल बिहारी की विदेश नीति छोड़ दी
शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि, बीजेपी ने पुरानी विदेश नीति छोड़ दी है। वह अटल बिहारी जी की नीति थी, वे हमेशा इराक के साथ रहे। अब बीजेपी अमेरिका के साथ है। यह कांग्रेस की पॉलिसी थी। इसलिए हमने कहा कि बीजेपी कांग्रेस की शागिर्द है, शिष्य है। उसकी सारी पॉलिसी पर अमल कर रहे हैं।
देश के नेता इजरायल के पिछलग्गू क्यों बने?
मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि, बीजेपी वाले कांग्रेस को फॉलो कर रहे हैं। उसी के पीछे-पीछे चल रहे हैं। इसलिए इजरायल के पिछलग्गू बने हुए हैं। यहां के नेता क्यों इजरायल के पिछलग्गू बने हुए हैं? तेल मुसलमानों से लेता है इंडिया, गैस मुसलमानों से लेता है इंडिया, खाद 100 परेंसट मुसलमानों से लेता है। असलाह (हथियार) खुद इंडिया बना रहा है, इजरायल से लेना क्या है? तुम तो 12 मुल्कों से दुश्मनी लेकर इजरायल के साथ मिलीभगत कर रहे हो। इसका मतलब कि इजरायल से इनकी सिर्फ एक पॉलिसी मिलती है कि मुसलमानों को किस तरह कुचला जाए, दबाया जाए। सिर्फ यही इजरायल से सीख रहे हैं।
मौलाना कल्बे जव्वाद ने मध्य पूर्व में जारी संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने फिलिस्तीन के मुद्दे पर भारत की पारंपरिक नीति का हवाला देते हुए कहा कि देश को शांति, मानवाधिकार और न्याय के पक्ष में मजबूती से खड़ा होना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है, क्योंकि बीजेपी लंबे समय से इजरायल के साथ मजबूत रणनीतिक और रक्षा संबंधों को अपनी विदेश नीति की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-इजरायल संबंधों को लेकर घरेलू राजनीति में समय-समय पर बयानबाजी होती रही है, लेकिन दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, तकनीक और सुरक्षा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। ऐसे में मौलाना कल्बे जव्वाद का यह बयान न केवल राजनीतिक बल्कि वैचारिक बहस को भी नया आयाम दे सकता है। आगामी चुनावी माहौल में इस तरह के बयान विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच विदेश नीति को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू कर सकते हैं।