PoK में बढ़ा जनाक्रोश, प्रदर्शनकारियों की मौत का आंकड़ा 46 पहुंचने का दावा

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मुजफ्फराबाद, 13 जून्‌ 2026 । पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों ने गंभीर रूप ले लिया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों तथा बाद की कार्रवाई में मृतकों की संख्या बढ़कर 46 तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। हाल के दिनों में रावलाकोट, मुजफ्फराबाद और अन्य इलाकों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जहां हजारों लोग राजनीतिक प्रतिनिधित्व, चुनावी सीटों के आरक्षण और स्थानीय अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरे।

दरअसल, PoK में विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों लेकर विवाद चल रहा है। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे।

PoK सुप्रीम कोर्ट ने 7 जून को आरक्षण खत्म करने की मांगों को खारिज कर दिया और कहा कि संवैधानिक संशोधन सरकार से छीनी जाने वाली कोई रियायत नहीं है। इस फैसले के बाद जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) इन सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है।

इस वजह से मुजफ्फराबाद, मीरपुर में बाजार, स्कूल, कॉलेज और दफ्तर बंद हैं। नेटबंदी भी जारी है। इससे घाटी बाहरी दुनिया से कटी हुई है।

कई नेताओं पर राजद्रोह का केस दर्ज

इससे प्रदर्शनकारियों का जोश कम नहीं हुआ है। उनमें नाराजगी और बढ़ गई है। JAAC के सदस्य धरने की तैयारी तेज कर रहे हैं। पाकिस्तानी आर्मी और सरकार ने पुंछ, मीरपुर और मुजफ्फराबाद में अतिरिक्त अर्धसैनिक बल तैनाती के आदेश दिए हैं। इनमें रेंजर्स और फ्रंटियर कॉन्स्टेबुलरी के जवान शामिल हैं।

विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों का मुद्दा और क्षेत्रीय अधिकारों की मांग बताई जा रही है। पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की सरकार ने कई प्रदर्शनकारी संगठनों पर कार्रवाई की है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के रूप में देख रहे हैं। इस बीच मानवाधिकार संगठनों और विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने हालात पर चिंता जताई है। कश्मीर के धार्मिक और राजनीतिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने भी स्थिति को “बेहद चिंताजनक” बताते हुए संयम बरतने की अपील की है। हालांकि मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग स्रोतों में भिन्न आंकड़े सामने आ रहे हैं, लेकिन इतना स्पष्ट है कि PoK में मौजूदा विरोध प्रदर्शन हाल के वर्षों के सबसे गंभीर आंदोलनों में से एक बन गए हैं और क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।

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