नई दिल्ली, 13 जून् 2026 । देश में महंगाई एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ाने लगी है। हालिया आर्थिक आंकड़ों के अनुसार खाद्य पदार्थों और परिवहन सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर पड़ रहा है। सब्जियां, फल, दूध, खाद्य तेल और अन्य रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम बढ़ने से परिवारों का खर्च बढ़ गया है। वहीं ईंधन की कीमतों और परिवहन लागत में वृद्धि का असर भी वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां, मौसम संबंधी परिस्थितियां और लॉजिस्टिक लागत में बढ़ोतरी खाद्य महंगाई को प्रभावित कर रही हैं। दूसरी ओर, परिवहन क्षेत्र में डीजल, रखरखाव और परिचालन खर्च बढ़ने से बस, टैक्सी और माल ढुलाई सेवाओं की लागत में भी इजाफा हुआ है। इसका असर बाजार में पहुंचने वाली वस्तुओं की अंतिम कीमत पर पड़ रहा है।
महंगाई दर में बढ़ोतरी के कारण मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर सबसे अधिक दबाव महसूस किया जा रहा है। घरेलू बजट में खाद्य पदार्थों और यात्रा संबंधी खर्च का हिस्सा बढ़ने से बचत पर असर पड़ रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में खाद्य आपूर्ति और ईंधन लागत की स्थिति महंगाई की दिशा तय करेगी।
सरकार और केंद्रीय बैंक की नजर भी महंगाई के आंकड़ों पर बनी हुई है। यदि खाद्य और परिवहन क्षेत्र में कीमतों का दबाव जारी रहता है तो उपभोक्ताओं को आने वाले समय में और अधिक खर्च का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि बेहतर फसल उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार से महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।