नई दिल्ली, भारत के 20 साल के ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानानंदा रमेशबाबू ने नॉर्वे चेस के आठवें राउंड में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को हराया। प्रज्ञानानंदा की यह टूर्नामेंट में 5 बार के वर्ल्ड चैंपियन कार्लसन के खिलाफ दूसरी जीत है।
मुकाबले के दौरान प्रज्ञानानंदा ने बेहद धैर्य, रणनीतिक समझ और सटीक चालों का प्रदर्शन किया। कार्लसन जैसे अनुभवी और विश्व के शीर्ष खिलाड़ी के खिलाफ जीत हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। युवा भारतीय ग्रैंडमास्टर ने दबावपूर्ण परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास बनाए रखा और शानदार खेल दिखाया।
इस जीत के साथ आर. प्रज्ञानानंदा भारत के दूसरे ऐसे खिलाड़ी बन गए हैं, जिन्होंने एक ही टूर्नामेंट में मैग्नस कार्लसन को दो बार हराया। इससे पहले 2007 में विश्वनाथन आनंद ने लिनारेस इंटरनेशनल टूर्नामेंट में कार्लसन को लगातार दो मुकाबलों में शिकस्त दी थी।
मैग्नस कार्लसन लंबे समय से विश्व शतरंज के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ जीत को प्रज्ञानानंदा के करियर की सबसे यादगार सफलताओं में से एक माना जा रहा है। इससे पहले भी भारतीय खिलाड़ी कई बार कार्लसन को कड़ी चुनौती दे चुके हैं, लेकिन हर ऐसी जीत का महत्व विशेष होता है।
प्रज्ञानानंदा की इस सफलता ने भारतीय शतरंज प्रेमियों में उत्साह भर दिया है। हाल के वर्षों में भारत के युवा खिलाड़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं और विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में प्रज्ञानानंदा का आत्मविश्वास और बढ़ाएगी। साथ ही यह नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी कि मेहनत, अनुशासन और प्रतिभा के बल पर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को भी चुनौती दी जा सकती है।