सुरों का एक युग हुआ ख़ामोश, दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की उम्र में निधन

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नई दिल्ली, 01 जून्‌ 2026 । भारतीय सिनेमा और संगीत जगत की प्रतिष्ठित पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने मुंबई स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि वे उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। उनके निधन की खबर से फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर फैल गई है।

उनकी करीबी दोस्त मंगला खाडिलकर ने बताया कि सुमन ने रात करीब 8 बजे अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ दिनों से अपने ही गाए हुए गाने सुन रही थीं। उन्होंने बहुत शांति से दुनिया को अलविदा कहा। उनका अंतिम संस्कार आज पवनहंस श्मशान घाट में राजकीय सम्मान के साथ हुआ।

सुमन कल्याणपुर हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की उन चुनिंदा आवाज़ों में शामिल थीं, जिन्होंने 1950 से 1970 के दशक के बीच कई यादगार गीतों को अपनी मधुर आवाज़ दी। उनकी गायकी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी कोमल, भावपूर्ण और सुरमयी शैली थी। संगीत प्रेमी आज भी उनके गीतों “ना ना करते प्यार”, “आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे”, “परबतों के पेड़ों पर” और “बुझा दिए हैं खुद अपने हाथों” को बड़े सम्मान और प्रेम से याद करते हैं।

सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को हुआ था। उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी, पंजाबी और कई अन्य भारतीय भाषाओं में भी गीत गाए। उनकी आवाज़ को अक्सर महान गायिका लता मंगेशकर की आवाज़ से मिलती-जुलती माना जाता था, लेकिन उन्होंने अपनी अलग पहचान और विशिष्ट शैली के दम पर संगीत जगत में खास स्थान बनाया।

भारत सरकार ने उनके संगीत योगदान को सम्मानित करते हुए उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया था। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित कई नेताओं और कलाकारों ने शोक व्यक्त किया और भारतीय संगीत जगत के लिए इसे अपूरणीय क्षति बताया।

सुमन कल्याणपुर का जाना भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत माना जा रहा है। हालांकि उनकी आवाज़ और उनके अमर गीत आने वाली पीढ़ियों के बीच हमेशा जीवित रहेंगे।

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