विधवा की पेंशन काटने पर SBI को हाईकोर्ट की फटकार, रकम लौटाने का आदेश

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नई दिल्ली, 29 मई 2026 । एक महत्वपूर्ण फैसले में हाईकोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को फटकार लगाते हुए विधवा महिला की काटी गई पेंशन राशि वापस करने का आदेश दिया है। अदालत ने साफ कहा कि यह मामला किसी प्रकार की धोखाधड़ी का नहीं बल्कि बैंक की लापरवाही और प्रशासनिक गलती का है। न्यायालय ने पाया कि कथित तौर पर ज्यादा दी गई यह रकम पूरी तरह से पेंशन प्रोसेसिंग में हुई गलतियों के कारण जमा हुई थी, न कि उस महिला की तरफ से किसी गलत जानकारी देने या कुछ छिपाने के कारण। जस्टिस संजीव नरूला ने इंदिरा नाम की एक महिला की याचिका मंज़ूर करते हुए बैंक को निर्देश दिया कि वह उसकी फैमिली पेंशन से पहले ही काटी गई रकम को 6 फीसदी सालाना ब्याज के साथ वापस करे। साथ ही, कोर्ट ने बैंक को भविष्य में किसी भी तरह की और रिकवरी करने से भी रोक दिया।

पेंशन से जुड़ा मामला 

याचिकाकर्ता के पति, जो एक सरकारी कर्मचारी थे। उनकी 2003 में नौकरी के दौरान ही मृत्यु हो गई थी। उसके बाद, दिल्ली सरकार की ओर से जारी एक पेंशन पेमेंट ऑर्डर के ज़रिए याचिकाकर्ता के लिए फैमिली पेंशन मंजूर की गई। इसका भुगतान SBI की एक ब्रांच के ज़रिए किया जाता था। लेकिन, एक बार पेंशन के भुगतान को लेकर महिला ने देखा कि उसकी मासिक पेंशन में अचानक भारी कटौती हो गई है।

मामला उस समय सामने आया जब एक विधवा महिला की पेंशन खाते से बैंक द्वारा अचानक रकम काट ली गई। बैंक ने इसे तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी कारण बताते हुए राशि समायोजित कर ली थी। महिला ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया और दावा किया कि बिना पूर्व सूचना के पेंशन राशि काटना अन्यायपूर्ण है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि महिला की ओर से किसी तरह की गलत जानकारी या धोखाधड़ी नहीं की गई थी। अदालत ने कहा कि यदि बैंक की आंतरिक प्रक्रिया में कोई त्रुटि हुई है तो उसका बोझ खाताधारक पर नहीं डाला जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पेंशन किसी व्यक्ति के जीवनयापन का महत्वपूर्ण साधन होती है और बिना उचित कारण उसे रोकना या काटना संवेदनहीन कदम माना जाएगा।

अदालत ने SBI को निर्देश दिया कि काटी गई पूरी राशि निर्धारित समय के भीतर महिला के खाते में वापस जमा की जाए। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए बैंकिंग प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने की सलाह भी दी गई।

इस फैसले को आम पेंशनधारकों और वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में अहम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश बैंकों को ग्राहकों, विशेष रूप से पेंशनभोगियों के मामलों में अधिक सावधानी बरतने का संदेश देता है।

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