ट्रम्प के बाद अब पुतिन का बीजिंग दौरा, अगले हफ्ते चीन पहुंचेंगे रूसी राष्ट्रपति

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बीजिंग, 16 मई 2026 । रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अगले सप्ताह चीन की राजधानी बीजिंग का दौरा कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से इस संभावित दौरे को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक शक्ति संतुलन, व्यापार और सुरक्षा मुद्दों पर दुनिया की नजर रूस और चीन के संबंधों पर टिकी हुई है।

यह इस साल पुतिन की पहली विदेश यात्रा होगी। यहां पर वे चीनी राष्ट्रपति से यूक्रेन जंग खत्म करने और परमाणु हथियार नियंत्रण समझौते को लेकर बातचीत कर सकते हैं। इसके अलावा वे चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग से अलग मुलाकात करेंगे। इसमें व्यापार और आर्थिक सहयोग पर चर्चा होगी।

दरअसल, ट्रम्प ने चीन की यात्रा के बाद कहा था कि अमेरिका, रूस और चीन के बीच संभावित तीन-तरफा न्यूक्लियर हथियार नियंत्रण समझौते का प्रस्ताव रखा है। इस पर तीनों देश बातचीत कर सकते हैं।

ट्रम्प ने कहा कि रूस का न्यूक्लियर हथियार भंडार अमेरिका और चीन दोनों के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में यह संभव है कि पुतिन और जिनपिंग के बीच इस मामले पर भी चर्चा होगी।

जानकारी के मुताबिक पुतिन की यह यात्रा रूस-चीन रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। इस दौरान ऊर्जा, व्यापार, रक्षा सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत होने की संभावना है। माना जा रहा है कि पुतिन की मुलाकात चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से भी हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच रूस और चीन लगातार एक-दूसरे के करीब आते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यह दौरा दोनों देशों के राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों को नई दिशा दे सकता है।

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के मुताबिक बीजिंग में संभावित बैठक के दौरान बहुपक्षीय सहयोग, ब्रिक्स, ऊर्जा आपूर्ति और एशियाई क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा अमेरिका और पश्चिमी देशों की नीतियों पर साझा रणनीति को लेकर भी विचार-विमर्श की संभावना जताई जा रही है।

दुनिया की नजर इस दौरे पर इसलिए भी बनी हुई है क्योंकि हाल के समय में वैश्विक कूटनीति में बड़े नेताओं की सक्रियता बढ़ी है। पुतिन का बीजिंग दौरा आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय समीकरणों और भू-राजनीतिक रणनीतियों पर असर डाल सकता है।

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