लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस पेश, सदन में बढ़ा सियासी तापमान

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नई दिल्ली, 12 फ़रवरी 2026 । लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस पेश किए जाने के बाद संसद के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सदन की कार्यवाही के संचालन में निष्पक्षता नहीं बरती जा रही, जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। हालांकि सत्तापक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक रणनीति बताया है।

विपक्ष ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस पेश कर दिया। इसमें 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। न्यूज एजेंसी IANS ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि ओम बिरला अब लोकसभा नहीं जाएंगे। अविश्वास प्रस्ताव के गिरने के बाद ही वह स्पीकर की चेयर संभालेंगे।

एजेंसी के मुताबिक विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में 9 मार्च को चर्चा हो सकती है। 13 फरवरी को बजट सत्र के वर्तमान सेशन का आखिरी दिन है। इसके बाद 8 मार्च से सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होगी।

इससे पहले बजट सत्र के 10वें दिन संसद दो बार स्थगित हुई। दोपहर 2 बजे से संसद की कार्यवाही शुरू हो सकी। शशि थरूर ने बजट पर चर्चा की शुरुआत की।

संविधान और संसदीय परंपराओं के अनुसार, लोकसभा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 14 दिन का नोटिस आवश्यक होता है। यदि प्रस्ताव को सूचीबद्ध किया जाता है, तो सदन में इस पर चर्चा और फिर मतदान होता है। स्पीकर, जो सदन के संचालन के लिए सर्वोच्च प्राधिकरण माने जाते हैं, आमतौर पर निष्पक्ष भूमिका निभाने के लिए बाध्य होते हैं। भारत में अब तक बहुत कम अवसरों पर स्पीकर के खिलाफ इस तरह का प्रस्ताव लाया गया है, जिससे यह कदम राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रस्ताव केवल प्रक्रियात्मक मुद्दा नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश भी हो सकता है। यदि प्रस्ताव पर चर्चा होती है, तो यह सदन में सरकार और विपक्ष के बीच शक्ति संतुलन की परीक्षा बन सकता है। संख्या बल इस प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभाएगा, क्योंकि प्रस्ताव पारित होने के लिए साधारण बहुमत पर्याप्त होता है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नोटिस स्वीकार कर इसे औपचारिक रूप से सूचीबद्ध किया जाएगा और क्या विपक्ष अपने समर्थन का आंकड़ा जुटा पाएगा। यह घटनाक्रम संसद के आगामी सत्र की दिशा तय कर सकता है।

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