राज्यसभा के समीकरणों से CM योगी ने 2027 का सियासी संकेत बताया, बोले- विधानसभा में भी ऐसा ही होगा
लखनऊ, 07 अक्टूबर 2026 । उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए समाजवादी पार्टी ने तीसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा, जिसके बाद बीजेपी के आठ और सपा के दो उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया है। इसी घटनाक्रम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए बड़ा दावा किया है।
लखनऊ में आयोजित ‘सेवा ज्योति यात्रा-विकसित भारत संकल्प सभा’ कार्यक्रम में अपने संबोधन में सीएम योगी ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश के राज्यसभा के चुनाव ने बता दिया है कि विधानसभा चुनाव का परिणाम क्या होने जा रहा है। ये लड़ाई 80-20 की फिर आ गई है। 80 फीसदी एनडीए में और 20 फीसदी पीडीए में… और पीडीए का क्या हाल होने वाला है, ये आपके सामने फिर से आने वाला है।’ सीएम योगी ने अपने भाषण में राज्यसभा चुनाव की तर्ज पर ही विधानसभा चुनाव का परिणाम रहने की भविष्यवाणी की है।
सपा ने क्यों नहीं उतारा तीसरा उम्मीदवार?
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों को लेकर पिछले कई दिनों से बीजेपी और सपा के बीच मुकाबले की चर्चा थी। बीजेपी के पास सात सीटों के लिए पर्याप्त संख्या बल था, जबकि सपा दो सीटें जीतने की स्थिति में थी। दसवीं सीट के लिए दोनों दलों के बीच गणित महत्वपूर्ण हो गया था।
सपा ने पहले तीसरे उम्मीदवार को उतारने के संकेत दिए थे। हालांकि, नामांकन के अंतिम दिन पार्टी ने तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारा। इसके बाद बीजेपी के आठ और सपा के दो उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया।
अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव पर किया फोकस
तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपना ध्यान आगामी विधानसभा चुनाव पर केंद्रित करने का संकेत दिया। राजनीतिक विश्लेषण में इसे राज्यसभा की एक सीट के लिए संभावित मुकाबले की जगह 2027 के बड़े चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी की रणनीति को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं भी सामने आ रही हैं।
राज्यसभा चुनाव में एक सीट के लिए करीब 37 विधायकों के प्रथम वरीयता वोट की जरूरत होती है। इसी संख्या बल के कारण दसवीं सीट को लेकर बीजेपी और सपा के बीच मुकाबले की संभावनाएं बनी थीं।
राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने उत्तर प्रदेश से आठ उम्मीदवार उतारे हैं। उम्मीदवारों के चयन में अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति भी दिखाई गई है। राजनीतिक रिपोर्टों में इसे 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा गया है।
बीजेपी के लिए यूपी का विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण है, जबकि सपा भी संगठन और चुनावी रणनीति को मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के बाद दोनों दलों की निगाह अब विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर रहने वाली है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इससे पहले सितंबर 2026 में भी 2027 विधानसभा चुनाव में बीजेपी की वापसी का दावा कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि बीजेपी की डबल इंजन सरकार बड़े बहुमत के साथ सत्ता में लौटेगी। यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक दावा है, जबकि वास्तविक चुनाव परिणाम मतदान और मतगणना के बाद ही सामने आएंगे।
2027 में होगा असली सियासी मुकाबला
राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने से तत्काल मुकाबला टल गया है, लेकिन इसका राजनीतिक असर 2027 की विधानसभा राजनीति में दिखाई दे सकता है। बीजेपी जहां राज्यसभा के मौजूदा समीकरण को अपने पक्ष में राजनीतिक संकेत के तौर पर पेश कर रही है, वहीं सपा विधानसभा चुनाव को मुख्य मुकाबला मानकर आगे बढ़ने की तैयारी में है।
उत्तर प्रदेश में अब चुनावी रणनीति, संगठन, सामाजिक समीकरण और सीटों के बंटवारे जैसे मुद्दे आने वाले महीनों में राजनीति के केंद्र में रहेंगे।