BRICS Summit 2026: PM मोदी- President शी जिनपिंग मुलाकात से लेकर पश्चिम एशिया संकट तक, क्यों खास है भारत में होने वाला सम्मेलन?
नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाला BRICS Summit भारत की कूटनीति के लिए बड़ा मौका है। मोदी-शी मुलाकात, पश्चिम एशिया संकट और साझा घोषणापत्र पर पूरी दुनिया की नजर है।
नई दिल्ली, 10 सितंबर 2026। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को होने वाला BRICS Summit इस बार सिर्फ एक सामान्य अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं है। बदलते वैश्विक समीकरण, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और भारत-चीन रिश्तों में हालिया नरमी ने इस सम्मेलन को और ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और ऐसे समय में दुनिया की नजर नई दिल्ली पर है।
मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात पर सबसे ज्यादा नजर
BRICS सम्मेलन से पहले सबसे बड़ा कूटनीतिक सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित द्विपक्षीय बातचीत को लेकर है। शी जिनपिंग की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों में आई नरमी के बीच हो रही है। सीमा से जुड़े मुद्दे, व्यापार, निवेश और आपसी भरोसा इस बातचीत के अहम विषय हो सकते हैं। हालांकि, किसी एक बैठक से सभी पुराने मतभेद खत्म हो जाएंगे, ऐसा मानना जल्दबाजी होगी।
पश्चिम एशिया संकट ने बढ़ाई BRICS की चुनौती
इस बार BRICS के सामने सबसे कठिन मुद्दों में पश्चिम एशिया की स्थिति भी शामिल है। अमेरिका-ईरान तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता का असर ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ रहा है। BRICS में ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देश शामिल होने के कारण साझा बयान तैयार करना आसान नहीं है। भारत की चुनौती यही है कि वह अलग-अलग देशों के हितों के बीच संतुलन बनाते हुए एक व्यावहारिक और स्वीकार्य रुख तैयार करे।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह Summit?
भारत के लिए BRICS सिर्फ आर्थिक सहयोग का मंच नहीं है। यह ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की बात आगे बढ़ाने और व्यापार, ऊर्जा, स्वास्थ्य, तकनीक तथा आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का अवसर है। सम्मेलन का एजेंडा खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था, आपदा-रोधी क्षमता और महत्वपूर्ण सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी केंद्रित है।
क्या चीन के साथ रिश्तों में आएगा नया मोड़?
मोदी-शी बातचीत होती है तो यह भारत-चीन संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत जरूर होगी। हाल के समय में सीमा पर तनाव कम करने और दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिशें हुई हैं। लेकिन व्यापार और निवेश से जुड़े सवाल, रणनीतिक अविश्वास और सीमा विवाद अभी भी मौजूद हैं। इसलिए इस मुलाकात को रिश्तों में सुधार की शुरुआत के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा, किसी अंतिम समाधान के तौर पर नहीं।